पालतू  पशुओं में –एनीमिया

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पालतू  पशुओं मेंएनीमिया

डॉ. वाई. सिंह, डॉ. वाई. वर्मा, डॉ. एम. जाटव, डॉ. ए. दुबे, डॉ. एम. स्वामी

पशु विकृती विज्ञान विभाग, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, जबलपुर(म.प्र.)

परिचय

पशुओं में खून की कमी को एनीमिया कहा जाता है। इसमें शरीर में खून की मात्रा कम हो जाती है या खून में हीमोग्लोबिन घट जाता है। इससे शरीर को पर्याप्त ताकत और ऑक्सीजन नहीं मिलती और पशु कमजोर पडने लगता है। खून की कमी पशुओं में आम समस्या है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो दूध उत्पादन, काम करने की क्षमता और पशु का जीवन – सब प्रभावित होता है।

खून की कमी सिर्फ पशु के शरीर को कमजोर नहीं करती, बल्कि किसान की आर्थिक स्थिति को भी नुकसान पहुँचाती है। जब पशु बीमार हो जाते हैं, तो यह न केवल उनके जीवन के लिए खतरनाक होता है, बल्कि किसान की आजीविका पर भी सीधा असर डालता है। दूध देने वाले पशुओं में उत्पादन घट जाता है, काम करने वाले पशु थककर बैठ जाते हैं, और गंभीर स्थिति में जानवर की जान भी जा सकती है। यही कारण है कि एनीमिया को समय पर पहचानना, उसका सही इलाज करना और उससे बचाव करना बहुत ज़रूरी है।

एनीमिया के कारण-

  1. खून बहना (रक्तस्राव):
  • चोट लगना या किसी दुर्घटना के कारण भी अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता है।
  • आंत में कीड़े (कृमि) लगना, जैसे टेपवर्म और हुकवर्म, रक्त की कमी का एक महत्वपूर्ण कारण है।
  • जूँ, किलनी और मक्खियाँ खून चूसकर भी एनीमिया का कारण बनती हैं।
  1. बीमारी या अन्य कारण
  • खून में लगने वाले परजीवी जैसे – बेबेसिया और थीलिरीया आदि  गंभीर समस्या उत्पन्न करते हैं|
  • कुछ जहरीले पौधे जैसे ब्रैकेन फर्न या ब्रैसिकेसी परिवार के सदस्य आदि ज्यादा खाने पर खून की कमी का कारण बनते हैं।
  • लंबे समय तक बिमारी रहने पर भी पशु का शरीर कमजोर हो जाता है और खून की कमी हो जाती है।
  1. पोषण की कमी:
  • खुराक में खनिज (लोहा, तांबा) और विटामिन की कमी, खराब गुणवत्ता वाला चारा आदि से भी एनीमिया होता है |
  • अगर पशु को लंबे समय तक खराब चारा या केवल सूखा चारा खिलाया जाए तो खून बनने के लिए जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
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लक्षण

  • पशु का सुस्त और कमजोर होना खाने-पीने में कमी आ जाना और वजन घट जाना।
  • दूध देने वाले पशुओं में दुग्ध उत्पादन का घट जाना |
  • जीभ, मसूड़ों और आँखों की झिल्ली का रंग लाल की जगह सफेद या फीका पड़ जाना।
  • साँस तेज चलना और हृदय की धड़कन बढ़ जाना |
  • ज्यादा कमजोरी में पशु का गिर जाना या मृत्युहो जाना (क्रॉनिक) |
  • परजीवी से होने वाले एनीमिया में बुखार, पीलिया और शरीर का पीला पड़ना भी देखने को मिलता है।

निदान

  • पशु का मुँह खोलकर मसूड़ों और आँख की झिल्ली देखें – लाल की जगह सफेद या पीला रंग दिखेगा।
  • काम करने की क्षमता अचानक घट जाए।
  • बार-बार कमजोरी और दुग्ध उत्पादन में कमी होना।
  • खून की जाँच से पुष्टि किजा सकता है| सीबीसी  टेस्ट में हीमोग्लोबिन और लाल रक्त कोशिकाओं  के कम स्तर से एनीमिया का पता चलता है।

उपचार

  1. अगर कीड़े या किलनी हैं तो उन्हें खत्म करने की दवा देना।
  2. खून का बहाव हो रहाहो तो उसे रोकने का प्रयास करना चाहिए|
  3. पोषण देना:हरा चारा, अच्छा दाना और मिनरल मिक्सचर खिलाना।
  4. लोहे, तांबे और विटामिन की दवाई देना|

बचाव के उपाय

  • नियमित रूप से कृमिनाशक दवा (कीड़े मारने की) देना|
  • जूँ और किलनी से बचाव के लिए दवा और साफ-सफाई का ध्यान रखना।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार देना जिसमें हरा चारा, दाना और मिनरल मिक्सचर शामिल हो।
  • चराई के लिए ऐसे खेत या जंगल से बचाना जहाँ जहरीले पौधे हों।
  • समय-समय पर पशु की जाँच करवाना|
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