बिहार की पशु प्रजनन नीति 2025: नस्ल सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम
Bihar’s Animal Breeding Policy 2025: A Revolutionary Step Towards Genetic Improvement
भारत में पशुपालन, विशेष रूप से बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्यों में, ग्रामीण आजीविका, पोषण सुरक्षा और आर्थिक विकास का एक मजबूत आधार है। लेकिन वर्षों से राज्य में पशुओं की स्थानीय गैर-वर्णित नस्लों की अधिकता, कम उत्पादन क्षमता और अनुचित प्रजनन व्यवस्थाओं के कारण दुग्ध उत्पादन एवं पशुधन विकास सीमित रहा है। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, बिहार सरकार ने वर्ष 2025 के लिए एक नई ‘पशु प्रजनन नीति‘ की घोषणा की है, जो राज्य के पशुधन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की क्षमता रखती है।
नई नीति की आवश्यकता क्यों पड़ी?
बिहार में पशुधन की बड़ी जनसंख्या होने के बावजूद उत्पादन स्तर अपेक्षाकृत कम है। इसके पीछे कई कारण हैं:
- स्थानीय नस्लों की संख्या अधिक लेकिन उत्पादन क्षमता कम
- अव्यवस्थित एवं असंगठित प्रजनन व्यवस्था
- नस्ल सुधार कार्यक्रमों की सीमित पहुंच
- जीन पूल का क्षरण और संकरण नस्लों का असंतुलन
- कृत्रिम गर्भाधान की कम स्वीकार्यता और प्रशिक्षित मवेशी तकनीशियनों की कमी
पशु प्रजनन नीति 2025: मुख्य विशेषताएँ
- नस्ल सुधार पर केंद्रित रणनीति:
- देसी नस्लों को संरक्षण देने के साथ-साथ उनके सुधार की नीति।
- बेहतर जीन पूल के लिए चयनात्मक प्रजनन को प्राथमिकता।
- Gir, Sahiwal, Rathi, Tharparkar जैसी उन्नत नस्लों को बढ़ावा।
- कृत्रिम गर्भाधान (AI) का व्यापक विस्तार:
- ग्रामीण क्षेत्रों में AI सेवाओं को सुलभ और सस्ती बनाना।
- प्रशिक्षित पैरा-वेट्स/पशु सेवा सहायक द्वारा सेवा प्रदान करने की योजना।
- AI केंद्रों की संख्या में वृद्धि और मोबाइल ब्रीडिंग वैन की शुरुआत।
- संकरण और नियंत्रित नस्लन (Cross Breeding & Grading Up):
- उत्पादकता में सुधार हेतु वैज्ञानिक विधि से नस्ल संकरण को बढ़ावा।
- बिना दिशा-निर्देश के क्रॉसब्रीडिंग को हतोत्साहित किया जाएगा।
- उत्कृष्ट प्रजनन बैलों/सीमन की उपलब्धता:
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) और Rashtriya Gokul Mission से समन्वय।
- निजी/सरकारी सीमन उत्पादन केंद्रों का सशक्तिकरण।
- जन जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम:
- पशुपालकों को नस्ल सुधार की आवश्यकता, लाभ और तरीकों पर प्रशिक्षण।
- स्वयं सहायता समूहों, महिलाओं, युवाओं को प्रशिक्षित कर ‘पशु सेवा मित्र’ बनाना।
- पंजीकरण और डेटा प्रबंधन प्रणाली:
- सभी AI की डिजिटल एंट्री, पशु जन्म रजिस्टर, प्रजनन रिकार्ड का रख-रखाव।
- e-Gopala App जैसे डिजिटल प्लेटफार्म का अधिक उपयोग।
नीति के संभावित लाभ
| लाभ | विवरण |
| उत्पादन वृद्धि | दूध, मांस, बछड़ों की गुणवत्ता में वृद्धि |
| रोज़गार | ग्रामीण युवाओं के लिए AI तकनीशियन, पशु सेवा मित्र के रूप में नए अवसर |
| महिला सशक्तिकरण | महिला स्वयं सहायता समूहों को AI कार्य से जोड़ना |
| स्वस्थ पशुधन | चयनात्मक प्रजनन से बीमारियों की रोकथाम |
| आर्थिक सुधार | उच्च उत्पादन से किसानों की आय में वृद्धि |
बिहार में नस्ल सुधार की संभावनाएं
बिहार के विभिन्न जिलों में विभिन्न नस्लों की उपयुक्तता के आधार पर क्षेत्रीय नस्ल सुधार कार्य योजना बनाई जा रही है:
- उत्तर बिहार में जर्सी संकरण अधिक सफल देखा गया है।
- दक्षिण बिहार में HF संकरण बेहतर उत्पादन दे रहा है।
- देसी नस्लों में Red Sindhi, Tharparkar आदि को लोकप्रिय बनाने पर ज़ोर।
विकसित बिहार की ओर एक मजबूत कदम
बिहार की पशु प्रजनन नीति 2025 न केवल पशुधन क्षेत्र को तकनीकी और वैज्ञानिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि यह राज्य को ‘विकसित भारत @2047′ की परिकल्पना के अनुरूप रोज़गार, पोषण और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी बनेगी। इस नीति की सफलता सार्वजनिक-निजी सहभागिता, पारदर्शिता और स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
बिहार सरकार का यह कदम निश्चित रूप से ‘कृषि से आत्मनिर्भरता‘ के सपने को साकार करेगा।
Bihar’s Animal Breeding Policy 2025: A Revolutionary Step Towards Genetic Improvement

Bihar Animal Breeding Regulation Bill- 2025



