गर्मी में बकरी पालन: राजस्थान के लिए लाभकारी और टिकाऊ समाधान

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गर्मी में बकरी पालन: राजस्थान के लिए लाभकारी और टिकाऊ समाधान

रोनक, अशोक बैन्धा, संजय कुमार रेवानी और सुभाष चंद

पशु चिकित्सा और पशुपालन प्रसार शिक्षा विभाग

स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पी.जी.आई.वी.ई.आर.), जयपुर

 परिचय

भौगोलिक क्षेत्रफल के अनुसार राजस्थान, भारत का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ-साथ, शुष्क और अर्धशुष्क जलवायु वाला प्रदेश है, जहां कृषि और पशुपालन ग्रामीण जीवन का अभिन्न अंग हैं। सीमित जल संसाधनों और सूखा प्रवण परिस्थितियों के कारण यहां बकरी पालन एक अत्यंत लाभकारी, टिकाऊ और कम लागत का व्यवसाय बन गया है। बकरी का मांस (चेवोन) भारत सहित कई देशों में उपभोक्ताओं द्वारा सबसे पसंदीदा मांस प्रकारों में से एक है।वसा ग्लोब्यूल्स के छोटे आकार के कारण बकरी का दूध आसानी से पच जाता है और परिवार के पोषण के लिए तैयार स्रोत के रूप में कार्य करता है। बकरी पालन के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ गर्मी अत्यधिक होती है, जैसे कि राजस्थान क्योंकि बकरियाँ गर्मी के मौसम में विशेष देखभाल की मांग करती हैं, चूँकि अत्यधिक गर्मी से उनकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जैसे कि दूध उत्पादन में कमी, प्रजनन समस्याएँ, और बीमारियाँ।

राजस्थान के लिए बकरी पालन क्यों उपयुक्त है?

  • राजस्थानीनस्लें जैसे सोजत, सिरोही, मरवाड़ी गर्मी सहन करने में सक्षम होती हैं।
  • बकरियाँराजस्थान की स्थानीय जलवायु के अनुकूल हैं।
  • बकरियाँकम पानी और कम चारे में भी जीवित रह सकती हैं।
  • मांस, दूध, खादऔर नस्ल सुधार – चारों दृष्टिकोण से फायदेमंद।
  • यहव्यवसाय छोटे और भूमिहीन किसानों के लिए आय का अच्छा स्रोत है।
  • राज्यमें लगभग 2 करोड़ से अधिक बकरियाँ पाई जाती हैं (राष्ट्रीय पशुगणना के अनुसार)।
  • राजस्थानभारत के कुल बकरी मांस उत्पादन में प्रमुख योगदानकर्ता है।
  • महिलाओंऔर स्वयं सहायता समूहों के लिए यह आत्मनिर्भरता का जरिया बन रहा है।

गर्मी में बकरी पालन की प्रमुख समस्याएं:

1. गर्मी का तनाव 

  • अत्यधिकतापमान में बकरियाँ सुस्त हो जाती हैं।
  • चाराखाना कम कर देती हैं।
  • दूधउत्पादन घट सकता है।
  • तेजसाँस लेना और पसीना आना इसके लक्षण हैं।

2. निर्जलीकरण 

  • गर्मीमें पिने के लिए पानी की जरूरत बढ़ जाती हैं।
  • अगरपर्याप्त पानी नहीं दिया जाए तो शरीर में पानी की कमी हो जाती हैं।
  • इससेकमजोरी, चक्कर आना, और कभी-कभी मौत भी हो सकती हैं।

3. भोजन में कमी 

  • गर्मीके कारण बकरियाँ कम खाना खाती हैं।
  • इससेउनका वजन और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं।
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4. प्रजनन क्षमता पर असर 

  • अत्यधिकगर्मी में गर्भधारण की संभावना घट जाती हैं।
  • बकरियाँगर्मी के कारण ताव में नहीं आतीं या गर्भ गिर जाता हैं।

5. संक्रमण और बीमारी 

  • गर्मीमें बैक्टीरिया और वायरस जल्दी पनपते हैं।
  • गर्मीऔर उमस में चीचड़ी, जूं, खाज-खुजली की समस्या आम हो जाती हैं।
  • गंदगीसे दस्त, निमोनिया, और अन्य बीमारियाँ फैल सकती हैं।

गर्मी में बकरी पालन की समस्याओं का समाधान:

1.  गर्मी में तनाव का समाधान:

  • बकरियोंको छायादार और हवादार पशु आवास में रखें।
  • शेडकी छत पर थर्मोकोल, घास,या सफेद चूने की कोटिंग करें ताकि गर्मी का असर कम हों सके।
  • दिनके समय चराने से बचें, सुबह जल्दी या शाम को चराएं।
  • बकरियोंके शरीर पर दिन में एक-दो बार ठंडा पानी छिड़कें।
  • बकरियोंके शेड में पंखे या कूलर लगाना अगर संभव हो, तो बहुत फायदेमंद रहेगा।

2.  निर्जलीकरण से बचाव:

  • बकरियोंको दिन में 3-4 बार ठंडा, साफ और ताजा पानी दें।
  • पानीमें  नींबू-नमक अथवा छाछ मिलाकर दें।
  • प्लास्टिकया लोहे के बजाय मिट्टी या सीमेंट की टंकी में पानी रखें, जिससे वह ठंडा रहे।

3. भोजन में रुचि बनाए रखना:

  • गर्मियोंमें हल्का, आसानी से पचने वाला चारा दें।
  • हराचारा: बरसीम, लूसर्न, स्टायलो, नेपियर घास का उपयोग करे।
  • सूखाचारा: छांछ/पानी में भिगोकर दें।
  • खनिजलवण और नमक चाट जरूर दें।
  • सुबह6 बजे से पहले या शाम को 6 बजे के बाद चराई करवाए।

4.  प्रजनन संबंधी समस्याओं का समाधान:

  • ग्रीष्मऋतू (मार्च-जून के बीच) में प्रजनन को टालें, क्योंकि इस समय में गर्भधारण में दिक्कत हो सकती हैं।
  • गर्भवतीबकरी की ठंडक और पोषण का विशेष ध्यान दें।

5. संक्रमण और बीमारियों से सुरक्षा:

  • बाड़ेकी रोजाना सफाई और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।
  • मच्छरऔर मक्खियों से बचाने के लिए पशु आवास में नीम का धुआँ या कीटनाशक जलाएं।
  • पशुचिकित्सक से सलाह लेकर समय-समय पर परजीवी नियंत्रण और टीकाकरण जरूर करवाएं।

लकड़ी से बना पर्यावरणअनुकूल घर

चारे के लिए हरी झाड़ी

मिट्टी और गोबर से बना प्राकृतिक घर

सीमेंट की बनी पानी पीने की नांद

 गर्मी में बकरी पालन – दैनिक देखभाल चार्ट

समय कार्य विवरण
सुबह हरे चारे का भोजन सुबह में चराई करें या हरा चारा डालें
पानी पिलाना ताजा ठंडा पानी दें
दोपहर पशु आवास में ठंडक बनाए रखें पशु आवास में पानी का छिड़काव करें
पानी स्प्रे करें बकरियों पर हल्के पानी का स्प्रे करें
शाम सूखा चारा या भूसा + खनिज मिश्रण हरा/सूखा चारा दें
पानी पिलाना ताजे पानी के साथ खनिज मिश्रण और नमक जरूर दें

 निष्कर्ष:

राजस्थान की कठोर जलवायु में बकरी पालन एक ऐसी पशुपालन प्रणाली है जो कम संसाधनों में भी उच्च लाभ देती है, परन्तु सही देखभाल नहीं की जाए तो उसके स्वास्थ्य, उत्पादन (दूध/वजन), और प्रजनन पर बुरा असर पड़ सकता है।उचित प्रशिक्षण, पशु स्वास्थ्य देखभाल और विपणन/बिक्री को जोड़ दिया जाए,तो बकरी पालन ग्रामीण आजीविका और राज्य की अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

 

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