मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना: अब हर गोवंश पर मिलेंगे ₹1500 प्रति माह, पशुपालकों के लिए सुनहरा अवसर

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मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना: अब हर गोवंश पर मिलेंगे ₹1500 प्रति माह, पशुपालकों के लिए सुनहरा अवसर

Mukhyamantri Nirashrit Govansh Sahbhagita Yojana: Now Receive ₹1500 Per Month for Each Abandoned Cow – A Golden Opportunity for Livestock Farmers

📅 पशुधन प्रहरी, 08 जुलाई 2025

उत्तर प्रदेश सरकार ने पशुपालकों और ग्रामीण किसानों के लिए एक सराहनीय पहल की है। मुख्यमंत्री निराश्रित/बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना” के तहत अब कोई भी पशुपालक बेसहारा गायों को गोद लेकर उनकी सेवा करके ₹6000 प्रति माह तक कमा सकता है।

इस योजना का उद्देश्य न केवल बेसहारा गोवंश की रक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना है, बल्कि गोसेवा, पशुपालकों की आयवृद्धि, और सड़कों पर घूम रही गायों की समस्या को भी समाप्त करना है।

🔍 योजना का उद्देश्य

  • 🌾 फसलों की रक्षा: आवारा गोवंश से खेतों को नुकसान से बचाना।
  • 🐃 देसी नस्लों का संवर्धन: गिर, साहिवाल, थारपारकर जैसी देसी नस्लों को बढ़ावा देना।
  • 🥛 पोषण मिशन: कुपोषित परिवारों को दूध प्रदान करना।
  • 💰 आय का साधन: पशुपालकों को अतिरिक्त आमदनी देना।

💡 योजना के लाभ

  • प्रति गोवंश ₹1500 मासिक (₹50 प्रतिदिन) डीबीटी के माध्यम से।
  • ✅ अधिकतम 4 गोवंश पर ₹6000 तक मासिक सहायता
  • दूध बिक्री से अतिरिक्त आय
  • गोबर और मूत्र से जैविक खेती, गोबर पेंट, और जैव उर्वरक का निर्माण।
  • फसलों की सुरक्षा और कुपोषण में कमी
  • ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा।

📋 पात्रता मानदंड

  • ✔️ उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी।
  • ✔️ गोपालन का अनुभव और स्थान की उपलब्धता (शेड, पानी, चारा आदि)।
  • ✔️ आधार से लिंक्ड बैंक खाता।
  • ✔️ प्राथमिकता: दुग्ध सहकारी समिति से जुड़े व्यक्ति और प्रशिक्षित पैरावेट्स।
  • ✔️ अधिकतम 4 गोवंश की सीमा (बछड़े शामिल नहीं)।
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महत्वपूर्ण: गोवंश को बेचना या छोड़ना कानूनन दंडनीय अपराध है।

🙏 पशुधन प्रहरी की विशेष अपील

यह योजना गोसेवा, पशुपालन, और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने वाली है। पशुधन प्रहरी सरकार के इस प्रयास का स्वागत करता है और केंद्र तथा अन्य राज्य सरकारों से अपील करता है कि वे भी इसी तरह पैरा वेट्स (पशु मित्रों) को भी शामिल करते हुए एक समानांतर आर्थिक प्रोत्साहन योजना लागू करें, ताकि पशुपालन क्षेत्र में जमीनी स्तर पर कार्यरत ग्रासरूट पशुसेवकों को सशक्त किया जा सके।

📢 अधिक जानकारी के लिए बने रहिए
🌐 www.pashudhanpraharee.com
✍️ संपादक: डॉ. राजेश कुमार सिंह

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