दूध और ब्रेड नहीं, सही आहार दें- बचाएं एक पक्षी की जान

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दूध और ब्रेड नहीं, सही आहार देंबचाएं एक पक्षी की जान

विवेक कुमार मौर्य1, जगमोहन राजपूत1, निधि श्रीवास्तव2 एवं अनुष्का गुप्ता3

1एम.वी.एससी. शोधार्थी, पशु औषधि विभाग, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, महू

2प्रोफेसर, पशु रोग विज्ञान विभाग, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, महू

3बी.वी.एससी. एवं ए.एच. छात्र, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, महू

बचाए गए या घायल पक्षियों की सही देखभाल में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उनके भोजन की होती है। अक्सर लोग दया या अज्ञानता में उन्हें दूध, ब्रेड या बिस्कुट दे देते हैं, लेकिन यह उनके पाचन तंत्र के लिए हानिकारक होता है और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है। हर पक्षी की उम्र और खानपान की आदत अलग होती है, इसलिए भोजन भी उसी के अनुसार देना जरूरी है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पक्षी किस उम्र के चरण में है।

सामान्यतः पक्षियों के तीन मुख्य चरण होते हैं– नेस्टलिंग, फ्लेजलिंग और वयस्क। नेस्टलिंग वे छोटे चूजे होते हैं जो अभी पूरी तरह पंखों से ढके नहीं होते और अक्सर उनकी आंखें बंद रहती हैं। ये पूरी तरह माता-पिता या देखभाल करने वाले व्यक्ति पर निर्भर होते हैं। इस अवस्था में उन्हें हर 2-3 घंटे में हल्का, गर्म और मुलायम भोजन देना चाहिए। व्यावसायिक हैंड-रीयरिंग फॉर्मूला सबसे सुरक्षित विकल्प होता है। आपात स्थिति में उबले अंडे की जर्दी, भीगा हुआ सेरेलैक या नरम अनाज और थोड़ा प्रोबायोटिक मिलाकर पतला घोल बनाया जा सकता है। भोजन का तापमान लगभग 38–41 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। फ्लेजलिंग वह अवस्था होती है जब पक्षी के पंख निकल आते हैं और वह फुदकना या छोटी उड़ानें भरना शुरू कर देता है। इस समय उसे हर 4–6 घंटे में भोजन दिया जा सकता है। उसे फल, भीगे हुए या अंकुरित दाने, और नरम उबले अनाज दिए जा सकते हैं। इस चरण में उसे स्वयं खाना सीखने के लिए प्रोत्साहित करना बहुत जरूरी होता है। वयस्क पक्षियों को उनकी प्रजाति के अनुसार प्राकृतिक आहार देना चाहिए। सामान्यतः भोजन की मात्रा उनके शरीर के वजन का लगभग 5–10 प्रतिशत प्रतिदिन होती है और उन्हें दिन में एक या दो बार खिलाया जा सकता है।

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पक्षियों को उनके खानपान के प्रकार के आधार पर भी भोजन दिया जाता है।

दाना खाने वाले पक्षी जैसे कबूतर, तोते, गौरैया और फिंच को बाजरा, कैनरी सीड, सूरजमुखी के बीज और भीगे हुए दाने दिए जा सकते हैं। बीमारी के समय उन्हें नरम भोजन जैसे उबला अंडा या दलिया दिया जा सकता है।

फल खाने वाले पक्षी जैसे कोयल, बुलबुल और हॉर्नबिल को केला, पपीता, आम, चीकू, अंगूर, अनार और बेरी जैसे फल दिए जा सकते हैं। अधिक मात्रा में खट्टे फल देने से बचना चाहिए।

कीट खाने वाले पक्षियों जैसे ड्रोंगो, स्विफ्ट, टेलरबर्ड और रॉबिन को मीलवर्म, क्रिकेट और अन्य कीट दिए जाते हैं। आपातकाल में उबला अंडा, कैट फूड और कैल्शियम या प्रोबायोटिक मिलाकर मिश्रण दिया जा सकता है।

सर्वाहारी पक्षी जैसे मैना, कौआ और स्टार्लिंग को फल, दाने, कीट और अंडे का मिश्रित आहार दिया जा सकता है।

नेक्टर खाने वाले पक्षियों जैसे सनबर्ड और फ्लावरपैकर के लिए 1:5 अनुपात में चीनी और पानी का ताजा घोल बनाया जाता है, जिसमें हल्की मात्रा में प्रोटीन स्रोत मिलाया जा सकता है। यह घोल हर कुछ घंटों में बदलना जरूरी होता है।

शिकारी पक्षियों जैसे चील, उल्लू और बाज को छोटे चूहे, चूजे या हड्डियों सहित कच्चा मांस देना चाहिए। केवल मांस देने से पोषण की कमी हो सकती है, इसलिए पूरा शिकार देना बेहतर होता है।

जलपक्षियों जैसे बगुले, बतख और एग्रेट को मछली, मेंढक, कीट और कुछ प्रजातियों में अनाज तथा हरी सब्जियां दी जा सकती हैं।

कुछ चीजें ऐसी हैं जो किसी भी पक्षी को नहीं देनी चाहिए:
• दूध या डेयरी उत्पाद
• ब्रेड या बिस्कुट
• मसालेदार या तला-भुना भोजन
• केवल फल या केवल एक ही प्रकार का भोजन

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इन चीजों से पाचन समस्या, पोषण की कमी और गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

यदि आपको कोई घायल या अनाथ पक्षी मिले, तो उसे तुरंत सुरक्षित और गर्म स्थान पर रखें। उसकी उम्र और प्रजाति पहचानने की कोशिश करें और उसी के अनुसार भोजन दें। साफ-सफाई, सही तापमान और संतुलित आहार से ऐसे पक्षियों को दोबारा स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है। जहां संभव हो, उन्हें जल्द से जल्द वन्यजीव पुनर्वास केंद्र या पशु चिकित्सक के पास पहुंचाना चाहिए।

 

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