बरसात में सूकर पालन के लिए विशेष सावधानियाँ

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बरसात में सूकर पालन के लिए विशेष सावधानियाँ

लेखक:  पवन महेश्वरी, और जगमोहन राजपूत

पशु चिकित्सा औषधि विभाग , पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, महू , (नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर)

  1. बाड़े की सफाई और निर्माण:
  • सूकरों के बाड़े की ज़मीन पक्की और ढलान वाली होनी चाहिए ताकि पानी जमा न हो।
  • वर्षा जल की निकासी के लिए नाली की उचित व्यवस्था करें।
  • बिछावन के लिए सूखी भूसी, लकड़ी का बुरादा या सूखा घास उपयोग करें।
  1. आहार और जल व्यवस्था:
  • हमेशा ताजा और संतुलित आहार दें, जिसमें ऊर्जा, प्रोटीन और मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा हो।
  • पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पिलाएँ, ताकि दस्त और संक्रमण से बचा जा सके।
    1. टीकाकरण और दवा:
  • बरसात से पहले और बाद में टीकाकरण अवश्य कराएँ।
  • विशेष रूप से FMD, Classical Swine Fever (CSF), और स्वाइन इंफ्लूएंजा जैसी बीमारियों से बचाव जरूरी है।
  • हर तीन महीने में कृमिनाशक दवा दें।
  1. कीट और मच्छर नियंत्रण:
  • बाड़े में नीम का धुआँ, हर्बल स्प्रे या कीटनाशक का उपयोग करें।
  • गड्ढों और ठहरे पानी को मिट्टी से भरें।

🌧बरसात के मौसम में सूकरों की सामान्य बीमारियाँ और उनके समाधान 🐖

परिचय:
बरसात का मौसम एक ओर जहाँ खेती और हरियाली के लिए अच्छा माना जाता है, वहीं पशुपालन, विशेषकर सूकर पालन में यह मौसम अनेक बीमारियाँ लेकर आता है। अत्यधिक नमी, कीचड़, बाड़े की गंदगी, दूषित पानी और मक्खी-मच्छरों की भरमार सूकरों को बीमार बना सकती है। यदि समय रहते उचित देखभाल और रोकथाम के उपाय किए जाएँ, तो इन समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है।

  1. त्वचा रोग (Skin Diseases)
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मुख्य कारण: कीचड़, नमी और साफ-सफाई की कमी
लक्षण: शरीर पर खुजली, लाल दाने, बाल झड़ना
समाधान:

  • सूकरों को सूखी और साफ जगह पर रखें।
  • नीम के पत्तों का उबला पानी या जीवाणुनाशक से नहलाएँ।
    • गंभीर स्थिति में पशु चिकित्सक की सलाह से एंटीफंगल/एंटीबैक्टीरियल दवाओं का प्रयोग करें।
  1. दस्त/पेचिश (Diarrhea)

 मुख्य कारण: दूषित पानी और आहार
लक्षण: पतला मल, सुस्ती, पानी की कमी
समाधान:

  • साफ और उबला हुआ पानी ही पिलाएँ।
  • संतुलित और हल्का आहार दें।
  • ORS घोल या इलेक्ट्रोलाइट मिलाएँ।
  • पशु चिकित्सक की सलाह से एंटीबायोटिक दें।
  1. निमोनिया (Pneumonia)

 मुख्य कारण: ठंडा, गीला और बंद वातावरण
लक्षण: तेज बुखार, नाक से पानी, साँस लेने में तकलीफ
समाधान:

  • बाड़े को गरम और हवादार रखें।
  • बरसात में गीले स्थानों से दूर रखें।
  • लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक से परामर्श लें।
  1. आंतरिक/बाहरी परजीवी संक्रमण (Parasite Infestation)

 मुख्य कारण: गंदगी और अस्वच्छ वातावरण
लक्षण: वजन में कमी, रूखा बाल, खुरदरी त्वचा
समाधान:

  • हर 3 महीने में कृमिनाशक दवा दें।
  • बाड़े की नियमित सफाई और कीटनाशक छिड़काव करें।
  1. खुरपकामुंहपका रोग (FMD)

 मुख्य कारण: वायरस संक्रमण
लक्षण: मुँह और खुरों में छाले या घाव, बुखार, लार आना
समाधान:

  • समय पर टीकाकरण अनिवार्य है।
  • संक्रमित पशु को अलग रखें।
  • चिकित्सकीय देखभाल तुरंत करवाएँ।

सामान्य सावधानियाँ:

✅ सूकरों का बाड़ा पक्का और ढलानयुक्त हो ताकि पानी जमा न हो।
✅ बिछावन में सूखी भूसी या लकड़ी का बुरादा डालें।
✅ कीट और मच्छरों से बचाव के लिए नीम तेल या हर्बल स्प्रे करें।
✅ हर सप्ताह बाड़े की सफाई करें और चूना डालें।
✅ समय-समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य परीक्षण कराते रहें।

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निष्कर्ष:
बरसात के मौस में सूकरों की देखभाल में लापरवाही भारी नुकसान पहुँचा सकती है। यदि किसान थोड़ी सावधानी बरतें और नियमित रूप से स्वच्छता, टीकाकरण और पोषण का ध्यान रखें, तो ये समस्याएँ आसानी से रोकी जा सकती हैं। सूकर स्वस्थ रहेंगे तो उत्पादन और लाभ दोनों बढ़ेंगे।

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