Clean Milk Production: An Approach to Consumer Safety in India

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Clean Milk Production: An Approach to Consumer Safety in India

स्वच्छ दूध उत्पादन: भारत में उपभोक्ता सुरक्षा के लिए दृष्टिकोण

पूजा तम्बोली, अनूप कुमार, गौरेन्द्र गुप्ता, अमित कुमार चौरसिया, मदन मोहन दास एवं कृष्ण कुँवर सिंह

भा.कृ.अनु.प.-भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झाँसी 284003 (उत्तर प्रदेश) भारत

*Corresponding author: tamboli.pooja307@gmail.com

भारत में उपभोक्ता सुरक्षा के लिए स्वच्छ दूध उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए, प्रमुख दृष्टिकोणों में शामिल हैंः पशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना, दूध देने के दौरान सख्त स्वच्छता प्रथाओं को बनाए रखना, उपकरणों की उचित सफाई और स्वच्छता, किसानों को अच्छे पशुपालन के बारे में शिक्षित करना और दूध संग्रहण केंद्रों पर गुणवत्ता नियंत्रण उपायों को लागू करना; दूध देने से पहले थन की सफाई, दूध देने वाले की स्वच्छता, उचित भंडारण की स्थिति और पशुओं की नियमित पशु चिकित्सा जांच जैसे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना।

स्वच्छ दूध उत्पादन का अर्थ है किसी भी तरह की गंदगी, घातक सूक्ष्मजीवों और दूषित पदार्थों से मुक्त दूध। दूध को सुरक्षित, पौष्टिक और उच्च गुणवत्ता में बनाए रखने के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक है। स्वच्छ दूध उत्पादन में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. पशुओं और उनके थनों की सफाई

स्वच्छ दूध उत्पादन में सबसे महत्वपूर्ण चरण पशुओं और उनके थनों की सही सफाई है। यह दूध को बैक्टीरिया, गंदगी, और अन्य दूषित पदार्थों से बचाने में मदद करता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:

  1. ) पशु की स्वच्छतासे यह सुनिश्चित होता है कि उसके शरीर से गंदगी और धूल दूध में न मिले।

 (a) नियमित स्नान

  • पशु को नियमित नहलाएं: गर्मियों में हर दिन और सर्दियों में सप्ताह में कम से कम 2-3 बार।
  • साफ पानी का उपयोग करें: पानी में हल्का एंटीसेप्टिक घोल मिलाया जा सकता है।
  • ब्रश का उपयोग: शरीर पर जमी हुई गंदगी और बालों पर जमी धूल हटाने के लिए ब्रश का प्रयोग करें।

(b) बालों की कटाई

  • थनों के पास और पूंछ के आसपास बालों की नियमित कटाई करें ताकि गंदगी और बैक्टीरिया वहां न जमें।

(c) पशु आवास की सफाई

  • पशु के बाड़े को नियमित रूप से साफ करें।
  • गोबर, मूत्र और अन्य अपशिष्ट को समय पर हटाएं।
  • सूखा और साफ चारा बिछाएं।

II) थनों (Udder) की सफाई

थनों की सफाई दूध को सीधे दूषित होने से बचाती है। इसके लिए खास ध्यान दिया जाना चाहिए।

(a) दूध दुहने से पहले की सफाई

  1. थनों को साफ पानी से धोएं
  • गुनगुने पानी का उपयोग करें।
  • यदि थनों पर गंदगी जमी हो, तो उन्हें मुलायम कपड़े या स्पंज से साफ करें।
    1. एंटीसेप्टिक घोल का उपयोग
  • पानी में हल्का एंटीसेप्टिक (जैसे पोटाशियम परमैंगनेट) मिलाएं।
  • इसे कपड़े में भिगोकर थनों को पोंछें।
    1. सुखाना
  • थनों को साफ और मुलायम तौलिये से सुखाएं।
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(b) दुहने के दौरान सफाई बनाए रखें

  • दूध दुहते समय थनों को बार-बार गंदा होने से बचाएं।
  • खुले स्थान या धूलभरे वातावरण में दूध न दुहें।

(c) दूध दुहने के बाद की सफाई

  1. थनों को धोएं
  • दुहने के बाद भी थनों को पानी और एंटीसेप्टिक घोल से साफ करें।
    1. थनों की मालिश करें
  • थनों में चोट या सूजन से बचने के लिए हल्के हाथ से मालिश करें।

      विशेष सावधानियां

  • थनों की जाँच: दूध दुहने से पहले थनों में किसी संक्रमण या सूजन का निरीक्षण करें।
  • साफ तौलिए का उपयोग: हर पशु के लिए अलग तौलिया या कपड़ा रखें।
  • मास्टाइटिस से बचाव: थनों को सूखा और स्वच्छ रखने से मास्टाइटिस (थनों की सूजन) का खतरा कम होता है।
  1. दूध दुहने की स्वच्छता
  • दूध दुहने वाले व्यक्ति की स्वच्छता: दूध दुहने वाला व्यक्ति अपने हाथ धोएं, साफ कपड़े पहनें और नाखून कटे हुए हों।
  • उपकरणों की सफाई: दूध दुहने में उपयोग होने वाले बर्तन, बाल्टी, और अन्य उपकरणों को हर बार उपयोग के बाद साफ करें।

चित्र: स्वच्छ दूध उत्पादन

3. दूध का उचित प्रबंधन (Proper Management of Milk)

स्वच्छ दूध उत्पादन में दूध का उचित प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चरण है। यह सुनिश्चित करता है कि दुहने के बाद दूध की गुणवत्ता बनाए रखी जाए और उसमें बैक्टीरिया या दूषित पदार्थ न पनपें। इस प्रक्रिया को विस्तार से हम समझेंगे:

I. दूध दुहने के तुरंत बाद की प्रक्रिया

(a) दूध का छानना

  • दूध को दुहने के तुरंत बाद छानना आवश्यक है ताकि उसमें मौजूद बाल, धूल, या अन्य ठोस कणों को हटाया जा सके।
  • इसके लिएस्टेनलेस स्टील या नायलॉन की महीन छलनी का उपयोग करें।

(b) दूध को ठंडा करना

  • दूध को बैक्टीरिया से बचाने के लिए इसे 4°C तक जल्दी ठंडा करें।
  • दूध को ठंडा करने के लिए बल्क मिल्क कूलर (Bulk Milk Cooler) या बर्फ के पानी का उपयोग किया जा सकता है।
  • ठंडा दूध बैक्टीरिया के विकास को धीमा करता है और दूध की ताजगी को लंबे समय तक बनाए रखता है।
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II. दूध का भंडारण (Storage)

(a) सही कंटेनर का चयन

  • दूध कोस्टेनलेस स्टील, ऐल्युमिनियम, या फूड-ग्रेड प्लास्टिक कंटेनर में रखें।
  • लोहे, तांबे, या खराब प्लास्टिक के कंटेनरों का उपयोग न करें क्योंकि यह दूध को दूषित कर सकता है।

(b) भंडारण स्थान की सफाई

  • दूध को रखने की जगह साफ और ठंडी होनी चाहिए।
  • स्थान पर धूल, गंदगी, या कीट न हों।

III. दूध का परिवहन (Transportation)

(a) परिवहन के लिए उपयुक्त वाहन

  • दूध को प्रसंस्करण केंद्र तक पहुंचाने के लिएविशेष रूप से डिजाइन किए गए मिल्क टैंकर या दूध की कैन का उपयोग करें।
  • टैंकर या कैन को हर बार उपयोग के बाद अच्छी तरह धोएं।

(b) परिवहन समय

  • दूध को दुहने के 2-4 घंटों के भीतर प्रसंस्करण केंद्र तक पहुंचाएं।
  • लंबे समय तक दूध को परिवहन में रखने से बैक्टीरिया पनप सकते हैं।

IV दूध की गुणवत्ता बनाए रखना

(a) तापमान की निगरानी

  • दूध का तापमान लगातार 4°C पर बनाए रखें।
  • गर्मी में दूध को ठंडा करने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतें।

(b) दूषित पदार्थों से बचाव

  • दूध को धूल, कीट, या अन्य दूषित पदार्थों से बचाएं।
  • परिवहन के दौरान कैन या टैंकर को अच्छी तरह से बंद रखें।

V. प्रसंस्करण (Processing)

(a) त्वरित प्रसंस्करण

  • दूध को जल्दी से जल्दी पाश्चुरीकरण (Pasteurization) या अन्य प्रसंस्करण के लिए भेजें।
  • यह प्रक्रिया दूध को बैक्टीरिया और रोगाणुओं से मुक्त बनाती है।

(b) गुणवत्ता परीक्षण

  • दूध को प्रसंस्करण से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच करें।
  • फैट, एसएनएफ (Solid-Not-Fat), और बैक्टीरिया की उपस्थिति का परीक्षण करें।

VI. सावधानियां

  • कभी भी दूध को खुले स्थान या धूलभरे वातावरण में न रखें।
  • उपकरणों और कंटेनरों की नियमित सफाई करें।
  • परिवहन और भंडारण के दौरान दूध को अत्यधिक गर्मी से बचाएं।

VII. दूध का उचित प्रबंधन क्यों जरूरी है?

  • गुणवत्ता बनाए रखने के लिए: दूषित दूध न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, बल्कि इसका बाजार मूल्य भी कम होता है।
  • शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए: ठंडा और सही तरीके से प्रबंधित दूध अधिक समय तक खराब नहीं होता।
  • स्वच्छता बनाए रखने के लिए: उपभोक्ताओं को सुरक्षित और पौष्टिक दूध उपलब्ध होता है।
  1. पशुओं की खुराक और पानी की गुणवत्ता
  • पशुओं को साफ और पोषणयुक्त चारा और पानी दें। दूषित पानी या खराब चारा दूध की गुणवत्ता को खराब कर सकता है।
  1. किसानोंकोदुग्ध उत्पादन से संबंधित शिक्षा और प्रशिक्षण देना
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किसानों को स्वच्छ दूध उत्पादन के लिए प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण है ताकि वे सभी प्रक्रियाओं को सही तरीके से अपनाएं।

  • जागरूकताअभियानः किसानों को स्वच्छ दूध उत्पादन के बेहतरीन उपायों के बारे में जानकारी देने के लिए कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करें।
  • स्वच्छताप्रोटोकॉल: व्यक्तिगत स्वच्छता और सही सफाई प्रक्रियाओं की आवश्यकता को रेखांकित करें।
  • अभिलेखरखनाः किसानों को पशु स्वास्थ्य और दूध उत्पादन के तरीकों का व्यापक अभिलेख रखने के लिए प्रोत्साहित करें।

दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता:

  • स्वच्छ दूध उत्पादन में, एक “सामान्य” शारीरिक कोशिका गणना (एस. सी. सी.)या सोमैटिक सेल काउन्ट को दूध के प्रति मिलीलीटर 200,000 कोशिकाओं से कम माना जाता है।
  • अच्छी विनिर्माण पद्धतियों  (Good Manufacturing Practices )/अच्छे पशुपालन प्रथाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उनका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
  • गांवों में स्वच्छ दूध उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाने, स्टेनलेस स्टील के डिब्बे/बर्तनों के प्रसार, दूध शीतलकों (bulk milk coolers) की स्थापना, सामुदायिक दूध पार्लरों आदि को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • दूध के संग्रह, भंडारण, शीतलन और परिवहन सुविधाओं को मजबूत करना ताकि उपज के स्व-जीवन(सेल्फ लाइफ)  में वृद्धि, रोजगार सृजन और उत्पादक को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित किया जा सके।
  • स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण दूध के उत्पादन के लिए किसानों/उत्पादकों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। दूध और दूध उत्पादों पर गुणवत्ता मानकों को लागू किया जाना चाहिए और इसके लिए उत्पादकों से लेकर उपभोक्ताओं तक कोल्ड चेन के रखरखाव पर जोर देने की आवश्यकता है।

उपरोक्त बातों को ध्यान में रखने से दूध में गंदगी और बैक्टीरिया का प्रवेश कम होगा। साथ ही साथ दूध की गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ बेहतर होगी। पशुओं के दूध की उत्पादकता, अच्छा पशु स्वास्थ्य और लंबी आयु को सुनिश्चित करने के लिए सही सफाई अत्यन्त आवश्यक है। गुणवत्ता, मांग और कीमत में वृद्धि के कारण स्वच्छ दूध उत्पादन न केवल उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि उत्पादकों के लिए भी फायदेमंद है।

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