“मेरा रेशम मेरा अभिमान” अभियान : एक अनोखा अनुभव—जब 25 किसानों ने बताया कि ग्रेनरी की धूल के बावजूद उन्हें कोई एलर्जी नहीं!
निधि सुखीजा1, श्याम कुमार2, इम्मानुएल गिलवैक्स प्रभु1, दीपिका उमेश1, विशाल मित्तल1, एन. बी. चौधरी1
1केन्द्रीय तसर अनुसंधान अवं प्रशिक्षण संस्थान, राँची (झारखंड)
2सहायक निदेशक (रेशम), जशपुर (छत्तीसगढ़)
26 जुलाई 2025 को, छत्तीसगढ़ के जशपुर ज़िले के कुनकुरी गाँव में “मेरा रेशम मेरा अभिमान” अभियान के अंतर्गत एक बेसलाइन सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान टसर और शहतूत रेशम पालन से जुड़े 25 किसानों से संवाद किया गया, जो नियमित रूप से ग्रेनरी में अंडों की देखभाल और कीट पालन के कार्य करते हैं—जहाँ धूल, मोथ स्केल्स, कीट अपशिष्ट और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों का लगातार सामना होता है।
सर्वेक्षण का उद्देश्य किसानों की कार्य-स्थितियों को समझना और यह जानना था कि इन occupational hazards का उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। परंतु जो तथ्य सामने आया, वह आश्चर्यजनक था—इनमें से किसी भी किसान को न खाँसी की शिकायत थी, न साँस की तकलीफ, न कोई एलर्जी! इसमें आयरन की प्रचुर मात्रा होती है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने और खून की कमी (एनीमिया) से बचाने में मदद करता है।
यह जानकर जिज्ञासा बढ़ी और बातचीत को गहराई दी गई। जवाब मिला—“हम रोज़ गुड़ खाते हैं!” किसानों ने बताया कि गुड़ उनका रोज़मर्रा का हिस्सा है|
गुड़, जिसे अक्सर एक पारंपरिक खाद्य सामग्री समझा जाता है, यहाँ एक संभावित स्वास्थ्य रक्षक के रूप में सामने आया। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही यह मानते हैं कि गुड़ श्वसन तंत्र को साफ करने, बलगम निकालने, गले की खराश में राहत देने, और शरीर में ऑक्सीजन प्रवाह को बेहतर करने में सहायक है। यही नहीं, यह धूल और प्रदूषण से उत्पन्न एलर्जी से भी बचाव कर सकता है।
एक वैज्ञानिक अध्ययन (Indian Journal of Experimental Biology, 1991) में भी यह पाया गया कि कोयले की धूल के संपर्क में आए चूहों को जब गुड़ दिया गया, तो उनके फेफड़ों की सूजन कम हो गई। यह अध्ययन ग्रामीण अनुभवों की वैज्ञानिक पुष्टि करता है।
सर्वेक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि जो किसान नियमित रूप से गुड़ का सेवन करते हैं, उन्हें ग्रेनरी के धूल भरे वातावरण से कोई श्वसन समस्या नहीं होती। गुड़ उनके लिए एक स्वादिष्ट, किफायती और प्रभावशाली स्वास्थ्य रक्षक बन चुका है।
अब समय है— सेरीकल्चर किसानों को गुड़ के औषधीय लाभों के प्रति जागरूक करने का, और इस अनुभव को और गहराई से समझने के लिए वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने का।
“मेरा रेशम मेरा अभिमान” अभियान केन्द्रीय रेशम बोर्ड (Central Silk Board) द्वारा चलाया गया एक जनजागरूकता कार्यक्रम है | अभियान के अंतर्गत यह अनुभव दर्शाता है कि हमारी पारंपरिक जीवनशैली में ऐसे कई समाधान निहित हैं, जिन्हें समझने और स्वीकारने की आवश्यकता है। गुड़ केवल स्वाद नहीं, स्वास्थ्य का प्रहरी है।




