पशु-स्वास्थ्य प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नैदानिक क्रांति और भविष्य की संभावनाएँ

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Artificial Intelligence (AI) in Animal Health Management: A Diagnostic Revolution and Future Prospects

पशु-स्वास्थ्य प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नैदानिक क्रांति और भविष्य की संभावनाएँ

अनिल गट्टानी, संजू मंडल, अमित कुमार, आफरीन खान, आनंद कुमार जैन, प्रगति पटेल, पूर्णिमा सिंह, आदित्य मिश्रा

पशु शरीर क्रिया एवं जैव रसायन विभाग,पशु चिकित्सा एवं पशु पालन महाविद्यालय, जबलपुर

पशु-स्वास्थ्य प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Inteligence: AI) के उपयोग को वैश्विक स्तर पर एक परिवर्तनकारी तकनीकी प्रगति के रूप में देखा जा रहा है। परंपरागत पशु-चिकित्सा प्रणाली जो मुख्यतः चिकित्सकों की प्रत्यक्ष निरीक्षण, अनुभव आधारित ज्ञान और सीमित प्रयोगशाला परीक्षणों पर आधारित रही है, अब तकनीक के नवाचारो से अपनी दक्षता का दायरा बढ़ा रही है। भौगोलिक दूरी, समय की कमी, रोगों के सूक्ष्म एवं असामान्य लक्षण तथा बढ़ते पशु उत्पादन दबाव ने इस क्षेत्र में उन्नत उपकरणों की आवश्यकता को और भी अधिक प्रासंगिक बना दिया है। इस संदर्भ में AI तथा इसकी शाखाएँ – मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग -एक नए प्रतिमान (paradigm) की स्थापना कर रही हैं। AI प्रणालियाँ विशाल जैविक एवं चिकित्सकीय आंकड़ों (Big data) का विश्लेषण कर पैटर्न, सहसंबंध और भविष्यवाणी योग्य संकेतों की पहचान कर सकती हैं। जैसे कि दुग्ध उत्पादन में सबसे महत्त्वपूर्ण रोगों में से एक थनेला रोग (Mastitis) प्रायः पारंपरिक तरीकों से देर से पता चलता है। AI आधारित छवि विश्लेषण मॉडल से स्वस्थ एवं संक्रमित थनों की तस्वीरों के सूक्ष्म आंकलन से रोग के प्रारंभिक चरण में हुए बदलावों को शीघ्र पहचाना जा सकता है जो चिकित्सक की दृष्टि से प्रायः छुट सकते है। इसी प्रकार, लंगड़ापन (lameness), जो दुधारू गायों के कल्याण और उत्पादकता को प्रभावित करता है| AI-संचालित कैमरा प्रणालियों द्वारा पशुओं की चाल (Gait) की सूक्ष्म निगरानी से शीघ्र पहचाना जा सकता है।

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इन्ही के साथ ध्वनि-विश्लेषण आधारित AI मॉडल भी विशेष महत्व रखते हैं। पोल्ट्री फ़ार्मिंग में मुर्गियों की सामूहिक ध्वनियों में अचानक आने वाले स्वर-परिवर्तन को रोग प्रसार के संभावित संकेत के रूप में उपयोग करना संभव हो गया है। इसी तरह, कुत्तों की खाँसी की ध्वनि का AI द्वारा विश्लेषण कर सामान्य श्वसन संक्रमण और गंभीर रोग के बीच अंतर किया जा सकता है। AI का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू वियरेबल तकनीक और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) भी पशु स्वास्थ्य प्रबंधन में उपयोगी है। स्मार्ट कॉलर, स्मार्ट कान टैग और निगलने योग्य सेंसर जानवरों के शरीर का तापमान, हृदय गति, जुगाली समय, गतिविधि स्तर आदि का लगातार सतत रूप से आंकडे एकत्रित करते हैं। इन आंकड़ों का समयानुसार विश्लेषण कर यह AI तकनीक पशु-पालक अथवा चिकित्सक को तुरंत अलर्ट देती है, फलस्वरूप किसी बीमारी या तनाव की आरंभिक स्थिति में ही उसका निदान तथा उपचार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, भविष्यवाणी विश्लेषण (forecasting) AI द्वारा निकट भविष्य में होने वाले विशेष रोग प्रकोपो की आशंका को सक्षम रूप से बताया जा सकता है ताकि समय रहते ही आगामी होने वाली बीमारियों का पूर्व प्रबंधन अच्छे तरीके से किया जा सके और पशु उत्पादन को नियमित रखा जा सके। उदाहरणस्वरूप, स्थानीय मौसम की स्थिति, पशुओं का आहार उपभोग, परिवहन रिकार्ड एवं पूर्व में हुई क्षेत्रीय महामारी को मिलाकर AI जोखिम मानचित्र (Risk map) तैयार करता है, जिससे महामारी नियंत्रण हेतु पूर्व-निवारक कदम उठाए जा सकें। अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर, AI का प्रयोग जीनोमिक्स और प्रयोगशाला निदान में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह तकनीक पशुओं की आनुवंशिक जानकारी का विश्लेषण कर रोग-प्रवृत्ति की पहचान कर सकती है, साथ ही रक्त या ऊतक की माइक्रोस्कोपिक छवियों का स्कैन कर परजीवियों अथवा असामान्य कोशिकाओं का अल्प समय में सटीकता से निदान कर सकती है।

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लाभ एवं संभावनाएँ:

  • उपचारकी सफलता और रोग-नियंत्रण की संभावना को बढाने के लिए आवश्यक है की निदान सटीक और शीघ्र हो, जो की इस तकनीक से संभव है।
  • रोगऔर तनाव का शीघ्र पता चलने पर पशु को पीड़ा कम होती है, जो की पशु कल्याण (Animal welfare) की स्तिथि में सुधार करने में सहायक है।
  • बड़ेपशुपालन उद्यमों में विशेष रूप से आर्थिक दृष्टि में लाभकारी तकनीक है क्यूंकि इसके द्वारा पशु उत्पादन में होनी वाली हानी को कम किया जा सकता है ।
  • रोगप्रसार को रोकने और “वन हेल्थ (One Health)” दृष्टिकोण के अंतर्गत मानव स्वास्थ्य की रक्षा में भी इसका योगदान रहेगा।

चुनौतियाँ एवं सीमाएँ:

  • इसतकनीक की उच्च लागत के कारण इसका उपयोग सीमित रह सकता है, विशेषकर विकासशील देशों के छोटे किसानों के लिए।
  • नईपीढ़ी के पशु चिकित्सकों एवं तकनीशियनों को इन तकनीकी नवाचारो के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता रहेगी।
  • अत्यधिकतकनीकी निर्भरता के कारण मानवीय निर्णय क्षमता की उपेक्षा का जोखिम इस तकनीक के साथ है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता को पशु स्वास्थ्य प्रबंधन की सहायक शक्ति के रूप में उपयोग पशु चिकित्सको की दक्षता को बढ़ा सकती है जिसके फलस्वरूप रोग निदान तथा रोग उपचार शीघ्र किये जा सके तथा पशुओ का उच्च उत्पादन व् उनका कल्याण सुनिश्चित किया जा सके और किसानो की आय में वृद्धि की जा सके। कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक को पशु प्रबंधन के विकल्प के रूप में समझने के बजाय हमे इसे इसकी सहायक शक्ति मानना श्रेयस्कर होगा।

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