अनुसूचित जाति उपयोजना अंतर्गत रबर मैट उपयोग द्वारा भैंसों के कल्याण में सुधार: गांव गुजर हेरि में एक क्षेत्रीय पहल

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अनुसूचित जाति उपयोजना अंतर्गत रबर मैट उपयोग द्वारा भैंसों के कल्याण में सुधार: गांव गुजर हेरि में एक क्षेत्रीय पहल

लेखक:
डॉ. आशीष भालाधरे¹, डॉ. एम. एच. जान¹, डॉ. ए. एस. हब्बू¹, डॉ. एफ. सी. तुतेजा², डॉ नवनीत सक्सेना2

संस्थान:
¹ भाकृअनुप– केन्द्रीय भैंस अनुसन्धान संसथान, उप परिषर नाभा, पंजाब – 147201
² भाकृअनुप– केन्द्रीय भैंस अनुसन्धान संसथान, हिसार, हरियाणा – 125001

भारत के ग्रामीण पशुपालन में पशु कल्याण अब भी सबसे कम ध्यान दिए जाने वाले पहलुओं में से एक है। परंपरागत रूप से पशुओं को कच्चे या आंशिक रूप से ईंट बिछे फर्श पर रखा जाता था तथा वे खुले चरागाहों में लंबे समय तक चरते थे। ये पुराने प्रबंधन तरीक़े भले ही साधारण थे, परंतु नरम ज़मीन व स्वाभाविक गतिशीलता के कारण पशुओं को अपेक्षाकृत बेहतर सुविधा प्रदान करते थे।

लेकिन, चरागाह भूमि में कमी, स्टॉल-फीडिंग में वृद्धि तथा टिन या सीमेंट के स्थायी शेड्स की ओर बढ़ते रुझान के कारण पशु अब अधिकांश समय कठोर कंक्रीट फर्श पर खड़े या लेटे रहते हैं। इस बदलाव के परिणामस्वरूप खुर चोट, जोड़ों में दर्द एवं चोटें तथा थन संक्रमण जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं। पशु सुविधा एवं स्वास्थ्य के महत्व को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय भैंस अनुसन्धान संस्थान, उप परिसर नाभा ने वित्तीय वर्ष 2024–25 में अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत पटियाला ज़िले के नाभा ब्लॉक स्थित गुजर हेरि  गाँव को मॉडल विलेज के रूप में चयनित किया। इस गाँव में 90% से अधिक अनुसूचित जाति परिवार हैं और पशुपालन उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है।

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प्रारंभिक सर्वेक्षण एवं कल्याण की आवश्यकता का आकलन

🔹 आधारभूत एवं आजीविका सर्वेक्षण

➡ 132 कुल परिवारों संख्या
➡ 117 अनुसूचित जाति (SC) परिवार
🔻 पशुधन स्थिति (Livestock Profile)

▶ 150 गौ-भैंस
— मुख्य दुग्ध उत्पादन स्रोत
— दैनिक आय एवं पोषण सुरक्षा में योगदान

▶ 50–60 बकरियाँ
— अतिरिक्त आय का साधन
— छोटे एवं सीमांत परिवारों के लिए उपयोगी

गाँव में सर्वे के दौरान यह देखा गया कि—
• अधिकांश पशु टिन शेड या खुले ढाँचों में रखे जाते हैं।
• फ़र्श मुख्यतः सीमेंटेड, टूटा-फूटा, असमान या सख्त मिट्टी का होता है।
• फर्श की सफाई कठिन, अक्सर गीला या फिसलन वाला पाया गया।
• पशुओं में पैर दर्द, खुर घिसाव एवं लेटने में असुविधा के संकेत मिले।
• कठोर, ठंडे या खुरदरे फ़र्श के कारण थन स्वच्छता प्रभावित पाई गई।

ये परिस्थितियाँ पशु सुविधा, प्रतिरक्षा, उत्पादकता तथा दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

समस्या की पहचान: कठोर फर्श एवं पशु असुविधा

चर्चा के दौरान ज्ञात हुआ कि अधिकांश परिवार भूमिहीन या अल्पभूधारक हैं तथा उच्च गुणवत्ता वाले रबर मैट खरीदना उनके लिए आर्थिक रूप से सम्भव नहीं है। जानकारी होने के बाद भी वे अपने शेड के लिए हज़ारों रुपये खर्च नहीं कर सकते थे।

आईसीएआर–सीआईआरबी की वैज्ञानिक टीम ने बताया कि कठोर फर्श से दीर्घकालीन समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, जैसे—

  • जोड़ों घावं एवं चोट
    • खुर की समस्या
    • थन से सम्बंधित बीमारियों का जोखिम
    • ठंड-गर्म फर्श से ताप तनाव
    • ऊर्जा संतुलन में खर्च, जिससे दूध उत्पादन घटता है

सीमेंट फर्श की गर्मी/ठंड से पशु शरीर ताप बनाए रखने में अधिक ऊर्जा खर्च करता है, परिणामस्वरूप दूध उत्पादन घटता है, रोग से उबरने में देर होती है तथा पशु-चिकित्सा व्यय बढ़ता है।

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रबर मैट: पशु कल्याण हेतु समाधान

 (चित्र 1. सीआईआरबी नाभा टीम द्वारा लाभार्थी किसानों को रबर मैट एवं मिनरल मिक्सचर वितरण)

समस्या के समाधान एवं पशु कल्याण को बढ़ावा देने हेतु अनुसूचित जाति से संबंधित पशुपालक परिवारों को बड़े पशुओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रबर मैट उपलब्ध कराए गए। इन मैटों का वितरण अप्रैल 2025 में संस्थान के निदेशक, वरिष्ठ वैज्ञानिकों तथा ग्राम के सरपंच की उपस्थिति में किया गया।

इसके द्वारा होने वाले लाभ एवं सवधनियों के बारें में किसानो को बताया गया कि रबर मैट—
• नरम एवं आरामदायक फर्श उपलब्ध कराते हैं
• जोड़ों, खुर एवं हॉक की चोट कम करते हैं
• थन को कठोर फर्श से बचाकर स्वच्छता बढ़ाते हैं
• विश्राम सुविधा बढ़ने से दूध उत्पादन सुधारता है
• ताप तनाव में कमी आती है
• हीट स्ट्रेस/कोल्ड शॉक सम्बंधित समस्याएँ घटती हैं

किसानों को इन मैट की उचित स्थापना, नियमित सफाई एवं पशुओं के व्यवहार में होने वाले परिवर्तन का अवलोकन करने का प्रशिक्षण दिया गया।

सकारात्मक परिणाम एवं किसानों की प्रतिक्रिया

 (चित्र 2. रबर मैट लगाने के बाद पशु आवास में सुधार)

कुछ ही सप्ताहों में किसानों ने निम्न परिवर्तन अनुभव किए—
• खड़े होने में बेहतर स्थिरता
• आरामपूर्वक लेटने की प्रवृत्ति में वृद्धि
• हॉक घावों में कमी
• थन व शरीर की बेहतर स्वच्छता
• पशुओं की संपूर्ण सेहत में सुधार

इस पहल से किसानों को समझ आया कि पशु कल्याण सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि उत्पादन एवं लाभ से सीधा जुड़ा है। प्रत्यक्ष परिणाम देखकर पशुपालकों में रुचि बढ़ी और वे भविष्य में ऐसे कल्याणकारी प्रथाओं को अपनाने के प्रति प्रेरित हुए। इस प्रयास ने मॉडल गाँव में वैज्ञानिक, व्यावहारिक एवं पशु-अनुकूल प्रबंधन को बढ़ावा देने की मजबूत नींव तैयार की है। अब रबर मैट का उपयोग समुदाय में चर्चा का विषय है और किसान एक-दूसरे को प्रेरित कर रहे हैं।

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निष्कर्ष

गुजर हेरि गाँव में एससीएसपी के अंतर्गत रबर मैट हस्तक्षेप ने सिद्ध किया कि छोटे एवं कम लागत वाले कल्याण उपाय भी पशु स्वास्थ्य, आराम व उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार ला सकते हैं। ऐसे सरल नवाचारों से ग्रामीण परिवार अधिक आर्थिक लाभ, स्वस्थ पशु एवं टिकाऊ डेयरी व्यवसाय प्राप्त कर सकते हैं।

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