मुर्गियों में टीकाकरण

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VACCINATION IN POULTRY

मुर्गियों में टीकाकरण

हरी राम मीना1, राजकमल मीना2, करिश्मा मीना3, मानवेन्द्र सिंह4, मनि‍षा मीना5

1,4 पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग, राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर

  1. पशु पोषण विभाग, राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर
  2. पशु औषधि विज्ञान, विभाग, राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, जोबनेर, जयपुर
  3. पशु प्रसूति विज्ञान, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थानकरनाल, हरियाणा

परिचय :-

पोल्ट्री फार्मिंग में मुर्गियों को टीकाकरण करना बेहद ही जरूरी है, इससे मुर्गियों को कई तरह के खतरे बचाया जा सकता है। टीकाकरण से कई बीमारियों को रोका जा सकता है। मुर्गियों को जब एक बार ​बीमारी लग जाती है, तो पूरे के पूरे फार्म में मुर्गियों की मौत होने लग जाती है। इसलिए मुर्गियों को वैक्सीन लगाना जरूरी होता है। एक टीका एंटीबॉडी का उत्पादन करने के लिए पक्षी की प्रतिरक्षा प्रणाली को ट्रिगर या बढ़ाकर किसी विशेष बीमारी को रोकने में मदद करता है। जो बदले में हमलावर जीवों से लड़ते हैं। ये इसलिए भी जरूरी है, कि जब मुर्गियों को बीमारी लग जाती है। तो उन्हें बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इससे बचाव ही इसका सबसे अच्छा तरीका है। तभी पोल्ट्री फार्मिंग में फायदा होगा, नहीं तो नुकसान होने लग जाएगा।

मुर्गियों में टीकाकरण तालिका (Vaccination Schedule for Poultry) :-

क्रं.सं. उम्र (Age) रोग का नाम (Disease) टीके का नाम (Vaccine) टीकाकरण का तरीका (Method)
1. 1 दिन मैरेक्स रोग एम. डी. वैक्सीन इन्ट्रामस्कुलर (I\M)
2. 5-7 दिन रानीखेत रोग एफ-1 अथवा  लासोटा आँख में बूँद (Eye drop)
3. 10-14 दिन गम्बोरो इन्टरमीडिएट आंख में
4. 25 दिन गम्बोरो इन्टरमीडिएट पानी में
5. 35 दिन रानीखेत व ब्रोन्काईटिस कम्बाइंड एन.डी.आई.वी. वैक्सीन पीने के पानी द्वारा / आँख में बूँद
6. 8 सप्ताह रानीखेत आर 2 बी वैक्सीन इंजेक्शन द्वारा
7. 10 सप्ताह फाउल पॉक्स फाउल पॉक्स, वैक्सीन इंजेक्शन द्वारा
8. 12 सप्ताह रानीखेत रोग (ND) आर 2 बी वैक्सीन इंजेक्शन द्वारा
9. 13 सप्ताह इन्फेक्सीयस ब्रोन्काईटिस (IBD) आई.बी. वैक्सीन पानी में
10. 16-18 सप्ताह ई. कोलाई (E. coli) ई. कोलाई टीका इंजेक्शन द्वारा
11. 18-20 सप्ताह संपूर्ण रोगों का बूस्टर ND + IB + IBD + Coryza आदि इंजेक्शन / पानी / ड्रॉप आदि
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टीकाकरण करते समय सावधानिया :-

  • टीके हमेशा निर्माता के निर्देश अनुसार संग्रहित और उपयोग करें।
  • केवल स्वस्थ पक्षियों का ही टीकाकरण करें, बीमार पक्षियों को अलग करें।
  • उक्त सारणी लेयर पक्षियों के लिए है। ब्रायलर पक्षियों के लिए क्रम संख्या 1, 2, 3 व 4 पर अंकित टीके लगाने हैं।
  • टीकाकरण के बाद उपकरणों को अच्छी तरह साफ व कीटाणुरहित करें।
  • टीकाकरण का पूरा रिकॉर्ड रखें और प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा ही टीका लगवाएँ।
  • पीने के पानी से दी जाने वाली वैक्सीन साफ व्यवस्था में दें और बाद में बचा पानी फेंक दें।

टीकाकरण प्रक्रिया:-

पोल्ट्री झुंड को टीके लगाने के विभिन्न तरीके हैं, यह महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक टीके के लिए सही विधि का उपयोग किया जाए।

  • इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन : इस विधि में मुर्गियों के स्तन की मांसपेशियों में टीका डालने के लिए सुई का उपयोग शामिल है। एक स्वचालित सिरिंज का उपयोग प्रक्रिया को तेज कर सकता है क्योंकि यह तकनीक को अपेक्षाकृत आसान बनाता है और पक्षी को नुकसान नहीं पहुंचाता है।
  • अंतस्त्वचा इंजेक्शन: इंट्रामस्क्यूलर इंजेक्शन के समान ही, लेकिन इस मामले में टीका त्वचा के नीचे इंजेक्शन दी जाती है, आमतौर पर गर्दन के पीछे। यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए कि टीका चिकन त्वचा में इंजेक्ट किया गया है (सिर्फ पंखों में नहीं)।
  • आंख में: एक आईड्रॉपर के माध्यम से चिकन की आंख में टीका लगाया जाता है। यहां से वैक्सीन लैक्रिमल डक्ट के जरिए श्वसन पथ में प्रवेश करती है।
  • नाक में: टीका मुर्गियों के नथुने में एक बूंद के रूप में लगाया जाता है।
  • मौखिक: मुर्गियों की चोंच में टीका लगाया जाता है। यहां से यह श्वसन तंत्र में अपना रास्ता बना सकता है या शरीर में प्रवेश करने से पहले पाचन तंत्र में जारी रह सकता है।
  • पेय जल: अपने झुंड के पीने के पानी में वैक्सीन मिलाना। यह टीकाकरण विधि कम समय लेने वाली और कम तनावपूर्ण है। केवल ठंडे, ताजे और साफ पानी का उपयोग करें
  • फुहार: एक उपयुक्त स्प्रे एप्लीकेटर का उपयोग करके, जो स्प्रे ड्रॉपलेट के आकार को नियंत्रित करता है, वैक्सीन को मुर्गियों पर या मुर्गियों के ऊपर की हवा में छिड़का जाता है। झुंड में सभी पक्षियों को समान वितरण सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।
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टीकाकरण के लाभ:

  • टीकाकरण मुर्गियों को विभिन्न संक्रामक रोगों से बचाता है, जो उनकी मृत्यु दर को कम करता है।
  • बीमारियों से मुक्त मुर्गियां बेहतर ढंग से बढ़ती हैं,और अंडे देती हैं, जिससे उत्पादकता में वृद्धि होती है।
  • टीकाकरण से बीमारियों के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ होता है।

टीकाकरण का महत्व:

मुर्गियों में टीकाकरण एक निवारक उपाय है, जो उन्हें बीमारियों से बचाने में मदद करता है। यह एक लागत प्रभावी तरीका है, जो मुर्गी पालन को अधिक टिकाऊ और लाभदायक बनाता है। टीकाकरण के बिना, मुर्गियां बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, जिससे मृत्यु दर बढ़ जाती है, और उत्पादकता कम हो जाती है।

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