गजराज के लिए दौड़: दलमा की वन्यजीव संरक्षण की ओर मैराथन यात्रा

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गजराज के लिए दौड़: दलमा की वन्यजीव संरक्षण की ओर मैराथन यात्रा

वन्यजीव सप्ताह 2025 पर झारखंड की प्रेरक पहल

हर वर्ष अक्टूबर के पहले सप्ताह में भारतभर में मनाया जाने वाला वन्यजीव सप्ताह न केवल जैव विविधता के प्रति जागरूकता का पर्व है, बल्कि यह संरक्षण के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर भी है। इस वर्ष झारखंड ने इस सप्ताह को एक विशेष आयोजन—गजराज के लिए दौड़ के रूप में मनाया, जो संरक्षण और समुदाय सहभागिता का अनूठा संगम है।

भारत की समृद्ध वन्यजीव विरासत

भारत विश्व के सबसे जैव-विविध देशों में से एक है। यहाँ पाए जाते हैं शाही बंगाल टाइगर, भारतीय हाथी, दुर्लभ पक्षी, सरीसृप और वनस्पतियाँ—जो न केवल पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण आजीविका का भी आधार हैं। वन्यजीव सप्ताह हमें इन प्रजातियों की रक्षा हेतु प्रेरित करता है।

दलमा अभयारण्य: झारखंड का वन्यजीव रत्न

जमशेदपुर के समीप स्थित दलमा वन्यजीव अभयारण्य, लगभग 195 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। यह एशियाई हाथियों के प्रवास कॉरिडोर के रूप में राष्ट्रीय महत्व रखता है। यहाँ हाथियों के अलावा तेंदुआ, भालू, हिरण, पैंगोलिन, विशाल गिलहरी, जंगली कुत्ते और दर्जनों पक्षी प्रजातियाँ सुरक्षित रूप से निवास करती हैं। हाल ही में पलामू टाइगर रिज़र्व से आए एक बाघ की उपस्थिति ने इसकी जैव विविधता को और समृद्ध किया है।

दलमा मैराथन: संरक्षण की ओर एक कदम

वन्यजीव सप्ताह 2025 के अंतर्गत आगामी 5 अक्टूबर 2025 को आयोजित होने वाली गजराज के लिए दौड़” नामक दलमा मैराथन, वन्यजीव संरक्षण को जन-आंदोलन में बदलने की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास है।

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इस आयोजन का नेतृत्व कर रहे हैं IFS अधिकारी श्री सबा आलम, DFO जमशेदपुर, जिनकी दूरदर्शिता और संवेदनशील नेतृत्व ने वन्यजीव संरक्षण को समुदाय सहभागिता से जोड़ने की मिसाल पेश की है।

इस 16 किमी लंबी मैराथन में विभिन्न आयु वर्गों और सामाजिक पृष्ठभूमि के प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य है—भारतीय हाथियों की सुरक्षा, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना, और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता को व्यापक रूप से फैलाना।

ऐसी पहलों का महत्व

  • 🧒 युवा सहभागिता: स्वस्थ मनोरंजन के साथ संरक्षण का संदेश
  • 🐘 हाथी संरक्षण: आवास ह्रास और संघर्ष जैसे मुद्दों पर ध्यान
  • 🌳 स्थानीय गर्व: जंगल रक्षकों और समुदाय को सम्मान
  • 🏞️ प्रकृति से जुड़ाव: पुरस्कार, मान्यता और अनुभव का अवसर

संरक्षण से पर्यटन तक: दलमा का नया युग

Dalma Wildlife Sanctuary

दलमा अभयारण्य अब इको-टूरिज्म की दिशा में अग्रसर है।

  • 200 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत रोपवे, काँच की पुलिया, पर्यटक कॉटेज, और शिव मंदिर के पास सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं।
  • 100 मीटर लंबा कैनोपी वॉक 2025 में शुरू हुआ, जो जंगल के ऊपर से वन्यजीवों को देखने का अनोखा अनुभव देता है।
  • 10 हेक्टेयर घासभूमि मृग प्रजातियों के लिए विकसित की जा रही है।
  • प्राकृतिक जलकुंड और छुपने के ठिकाने वन्यजीवों के लिए बनाए गए हैं।

शैक्षिक और साहसिक अनुभव

दलमा न केवल वन्यजीवों का घर है, बल्कि यह ट्रैकिंग प्रेमियों, परिवारों और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक रोमांचक स्थल है। यहाँ शिव मंदिर, नेचर इन्फॉर्मेशन सेंटर, और सामुदायिक वन्यजीव गणना जैसे कार्यक्रम चलते हैं।

आवास और पहुँच

दलमा में वन विभाग के विश्राम गृह, हट्स, बाँस के झोपड़े और इको-फ्रेंडली रिज़ॉर्ट उपलब्ध हैं। यह जमशेदपुर से मात्र 10 किमी दूर है और चांडिल रेलवे स्टेशन से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

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समुदाय और संरक्षण

दलमा के चारों ओर स्थित 85 से अधिक गाँवों को संरक्षण परियोजनाओं से जोड़ा गया है। DFO सबा आलम के नेतृत्व में जल संरचनाओं, मृदा-आद्रता विकास और युवाओं को जोड़ने वाली गतिविधियाँ जैसे दलमा मैराथन स्थानीय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

निष्कर्ष

वन्यजीव सप्ताह 2025 के अवसर पर दलमा की यह पहल एक प्रेरणा है—जहाँ संरक्षण केवल नीति नहीं, बल्कि जन-भागीदारी बन चुका है।
गजराज के लिए दौड़ केवल एक मैराथन नहीं, बल्कि भारत की प्राकृतिक विरासत की रक्षा का संकल्प है।

आइये दलमा—जहाँ हर कदम प्रकृति के करीब है, और हर पल साहसिक।

✍️ डॉ. राजेश कुमार सिंह
प्रधान संपादक – पशुधन प्रहरी
कन्टेंट लेखक – झारखंड जैव विविधता बोर्ड (JBB)
📞 9431309542

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