8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष पशु चिकित्सकों की आवाज बुलंद – VAI ने उठाए महत्वपूर्ण मुद्दे

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8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष पशु चिकित्सकों की आवाज बुलंद – VAI ने उठाए महत्वपूर्ण मुद्दे

नई दिल्ली 

देशभर के पशु चिकित्सकों के अधिकारों, सम्मान और सेवा शर्तों से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर Veterinary Association of India (VAI) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) के समक्ष एक सशक्त और प्रभावशाली प्रस्तुति दी है। यह प्रतिनिधिमंडल VAI के महासचिव डॉ. राधाकृष्ण पुलिकांति के नेतृत्व में आयोग के समक्ष उपस्थित हुआ।

8वां केंद्रीय वेतन आयोग, जिसे भारत सरकार द्वारा गठित किया गया है, की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग में आईआईएम बेंगलुरु के प्रो. पुलक घोष (अंशकालिक सदस्य) एवं श्री पंकज जैन (सदस्य-सचिव) भी शामिल हैं। यह आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पेंशन, पदोन्नति एवं सेवा शर्तों की व्यापक समीक्षा कर रहा है, जिसकी सिफारिशें देशभर के लाखों कर्मचारियों के भविष्य को प्रभावित करेंगी।

पशु चिकित्सकों की भूमिका को किया रेखांकित

VAI द्वारा प्रस्तुत विस्तृत ज्ञापन में पशु चिकित्सकों की बहुआयामी भूमिका को प्रमुखता से रखा गया। इसमें बताया गया कि पशु चिकित्सक न केवल पशुधन विकास  बल्कि—

ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण

खाद्य सुरक्षा

सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षण

जैव-सुरक्षा (Biosecurity)

वन हेल्थ (One Health) अवधारणा

में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

संस्था ने स्पष्ट किया कि भारत के पशुधन क्षेत्र की मजबूती और कृषि अर्थव्यवस्था में वृद्धि के पीछे पशु चिकित्सकों की अहम भूमिका है।

मुख्य मांगें: समानता, सुरक्षा और सम्मान

VAI ने आयोग के समक्ष पशु चिकित्सकों के लिए निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं—

चिकित्सकों (MBBS) एवं दंत चिकित्सकों के समान पूर्ण वेतन समानता (Pay Parity)

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Dynamic Assured Career Progression (DACP) का लागू होना

Central Veterinary Service (CVS) की स्थापना

Non-Practicing Allowance (NPA) की निरंतरता

जोखिम भत्ता (Risk Allowance)

उच्च शिक्षा एवं शोध हेतु प्रोत्साहन (Incentives)

जोखिमपूर्ण कार्य परिस्थितियों का मुद्दा प्रमुख

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पशु चिकित्सक अक्सर अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं। वे नियमित रूप से रेबीज (Rabies), ब्रुसेलोसिस (Brucellosis) जैसे खतरनाक ज़ूनोटिक रोगों के संपर्क में रहते हैं, जो सीधे मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा हैं।

इसके बावजूद, पशु चिकित्सकों को—

वेतन असमानता

सीमित पदोन्नति अवसर

संस्थागत पहचान की कमी

कैरियर विकास में बाधाएं

जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

पशुधन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में भूमिका

VAI ने यह भी रेखांकित किया कि भारत का पशुधन क्षेत्र देश के कृषि GDP में लगभग 30–32% योगदान देता है और करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का आधार है।

दूध, अंडा, मांस एवं अन्य पशुधन उत्पादों के उत्पादन में हुई अभूतपूर्व वृद्धि पशु चिकित्सकों की मेहनत और सेवाओं का ही परिणाम है।

डॉ. पुलिकांति का बयान

इस अवसर पर डॉ. राधाकृष्ण पुलिकांति ने कहा—

“पशु चिकित्सकों के मुद्दे केवल सेवा शर्तों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह किसानों की समृद्धि, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और देश की आर्थिक प्रगति से सीधे जुड़े हुए हैं। यदि हमें एक स्वस्थ और समृद्ध भारत बनाना है, तो पशु चिकित्सा सेवाओं को सशक्त करना अनिवार्य है।”

देशभर के पशु चिकित्सकों में आशा की किरण

VAI द्वारा 8वें वेतन आयोग के समक्ष प्रस्तुत यह मजबूत पक्ष देशभर के पशु चिकित्सकों के बीच नई उम्मीद और विश्वास का संचार कर रहा है।

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संस्था ने आशा व्यक्त की है कि आयोग पशु चिकित्सकों के हित में ऐतिहासिक एवं न्यायसंगत निर्णय लेगा, जिससे इस महत्वपूर्ण पेशे को उचित सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण मिल सके।

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