सर्दियों में पशुओं की देखभाल कैसे करें
डॉ. प्रबुद्ध दुबे1* एवं डॉ. अरुणिमा सिंह2
1पशु प्रजनन, मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय (COVAS), मेरठ – 250110, उत्तर प्रदेश
2पशु विकृति विज्ञान विभाग, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (डुवासु) मथुरा – 281001, उत्तर प्रदेश
*संपर्क लेखक: prabuddhdubey16@gmail.com
सर्दियों में पशु आवास कैसा होना चाहिए?
सर्दियों के मौसम में तापमान सामान्यतः 5°C से 22°C के बीच रहता है। यह तापमान पशुओं के लिए अनुकूल माना जाता है, परंतु उन्हें ठंडी हवाओं तथा अत्यधिक ठंड से बचाना भी आवश्यक है। इसलिए इस मौसम में पशु आवास की उचित व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
- प्रत्येक गाय या भैंस के लिए कम से कम 5.5 फीट चौड़ी तथा 10 फीट लंबी पक्की जगह होनी चाहिए।
- पशुशाला का फर्श खुरदुरा एवं हल्के ढलान वाला होना चाहिए, जिससे पानी की उचित निकासी हो सके।
- पशुशाला की छत लगभग 10 फीट ऊँची होनी चाहिए। इसे ईंट, टिन अथवा फूस से बनाया जा सकता है।
- पशुशाला की दीवारें 4–5 फीट ऊँची होनी चाहिए तथा ऊपरी भाग में जाली लगाई जा सकती है।
- सर्दियों में रात्रि के समय जाली वाले भाग को टाट या बोरे के पर्दों से ढक देना चाहिए, ताकि ठंडी हवाओं से पशुओं की सुरक्षा हो सके।
- पशुशाला में साफ एवं स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। पानी की टंकी या नांद की नियमित सफाई एवं समय-समय पर चूने से सफेदी करनी चाहिए, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो।
- विशेष रूप से नवजात बछड़ों एवं बछियों के लिए फर्श पर सूखे भूसे या पुआल का बिछावन करना चाहिए। इसे समय-समय पर बदलते रहना चाहिए, ताकि नमी न रहे और पशु ठंड से सुरक्षित रहें।
सर्दियों में पशुओं का पोषण कैसे करें?
एक वयस्क पशु को प्रतिदिन लगभग 6 किलोग्राम सूखा चारा तथा 15–20 किलोग्राम हरा चारा देना चाहिए। दलहनी एवं गैर-दलहनी हरे चारे को संतुलित अनुपात में खिलाना चाहिए। हरे चारे की फसल को फूल आने की अवस्था में काटकर खिलाने से उसकी पौष्टिकता अधिक रहती है।
सूखा चारा, हरा चारा, संतुलित पशु आहार तथा खनिज मिश्रण को मिलाकर सानी बनाकर दिन में 3–4 बार खिलाना चाहिए। इससे चारे की बर्बादी कम होती है तथा पाचन क्षमता में सुधार होता है।
उपलब्ध चारे एवं भूसे का संरक्षण कैसे करें?
सर्दियों के मौसम में हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता रहती है, लेकिन गर्मियों में अक्सर हरे चारे की कमी हो जाती है। इसलिए आवश्यकता से अधिक उपलब्ध चारे का संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वर्षभर पशुओं को पौष्टिक चारा उपलब्ध कराया जा सके।
हे (Hay) बनाकर चारे का संरक्षण
हरे चारे को सुखाकर हे (Hay) के रूप में संरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए नरम तने वाली घासों अथवा चारे की फसल को उचित अवस्था में काटकर 5–10 किलोग्राम के छोटे-छोटे गट्ठर बना लें। इन गट्ठरों को एक-दूसरे के सहारे खड़ा करके धूप में अच्छी तरह सुखाएँ। सुखाने के दौरान उन्हें समय-समय पर पलटते रहें, ताकि सभी भाग समान रूप से सूख जाएँ। अच्छी तरह सूखा हुआ हे लंबे समय तक सुरक्षित रहता है तथा पशुओं के लिए पौष्टिक आहार का अच्छा स्रोत होता है।
यूरिया उपचारित भूसा (Urea Treated Straw)
भूसे की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए उसका यूरिया उपचार किया जा सकता है। इससे भूसे में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है तथा उसकी पाचन क्षमता में सुधार होता है।
यूरिया उपचार की विधि निम्नलिखित है—
- 4 किलोग्राम यूरिया को 40 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलें। यह घोल 100 किलोग्राम भूसे के उपचार के लिए पर्याप्त होता है।
- किसी समतल स्थान पर प्लास्टिक शीट बिछाकर लगभग 3–4 इंच मोटी भूसे की परत फैलाएँ।
- इस पर यूरिया के घोल का समान रूप से छिड़काव करें।
- इसी प्रकार भूसे की परत और यूरिया के घोल की परतें बनाते जाएँ तथा प्रत्येक परत को पैरों से अच्छी तरह दबाएँ।
- अंत में पूरे ढेर को प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढक दें तथा किनारों को मिट्टी या गोबर से बंद कर दें, ताकि हवा अंदर न जा सके।
- गर्मियों में लगभग 21 दिन तथा सर्दियों में 28 दिन बाद उपचारित भूसा उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।
- पशुओं को खिलाने से पहले उपचारित भूसे को 10–15 मिनट खुली हवा में फैला दें, जिससे अमोनिया गैस निकल जाए।
- शुरुआत में उपचारित भूसा थोड़ी मात्रा में दें और धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाएँ, ताकि पशु इसे आसानी से खाने लगें।
यूरिया उपचार से भूसे में प्रोटीन की मात्रा लगभग 4% से बढ़कर 8–9% तक हो सकती है। संतुलित आहार में उपचारित भूसे का उपयोग लगभग 30% तक किया जा सकता है।



