कोरोना का असर: Milk और डेयरी प्रोडक्ट की बिक्री 40% तक कम हुई, डेयरी कंपनियों ने भी दूध की खरीद घटाई

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पशुधन प्रहरी नेटवर्क,
नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2020,

कोरोना महामारी को लेकर देशभर में किए गए 21 दिन के लॉकडाउन ने डेयरी इंडस्ट्री की कमर तोड़ कर रख दी है। कोरोना वायरस के कारण देश भर में चल रहे लॉकडाउन के कारण दूध की बिक्री में आई गिरावट से कंपनियों के साथ ही किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। होटल, दुकान, रेस्टोरेंट तथा फैक्ट्रियां बंद होने से दूध एवं दूध उत्पादों की बिक्री 30 से 40 फीसदी तक कम हो गई है। दूध की बिक्री घटने से देसी धी, पाउडर आदि का स्टॉक बढ़ रहा है, जिस कारण कुछ कंपनियों ने दूध की कीमतों में भी कटौती कर दी है।
गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जीसीएमएमएफ), Amul डेयरी के मैनेजिंग डायरेक्टर आर एस सोढ़ी ने आउटलुक को बताया कि होटल, रेस्टोरेंट और हलवाई समेत कमर्शियल ऑफिस बंद होने के कारण दूध की बिक्री 10 से 12 फीसदी तक घट गई है। उन्होंने बताया कि दूध की कुल खरीद में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी ज्यादा है। हवलाई, होटल और दुकानें आदि बंद होने के कारण प्राइवेट कंपनियों के साथ ही दूधियों की खरीद भी कम हो गई है, जिस कारण सहकारी कंपनियों के पास ज्यादा दूध आ रहा है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के बाद से अमूल ने गुजरात से दूध की खरीद 8 फीसदी और अन्य राज्यों राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र से 60 फीसदी तक बढ़ा दी है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के कारण दूध के साथ ही दूध उत्पादों की बिक्री में भारी कमी आई है, जिस कारण कंपनियां मिल्क पाउडर ज्यादा बना रही हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है जैसे ही गर्मी बढ़नी शुरू होगी, दूध उत्पादन में कमी आयेगी और मांग में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने कहा कि सप्ताह भर बाद हालात में और सुधार आएगा।

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डेयरी कंपनियों ने की दूध खरीद में कटौती की

राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (आरसीडीएफएल) के डिप्टी मैनेजर विनोद गेरा के अनुसार मध्य मार्च तक कंपनी दैनिक आधार पर 40 से 41 लाख लीटर दूध की खरीद कर रही थी। कोरोना वायरस के कारण देश भर में हुए लॉकडाउन के कारण दूध के साथ ही उत्पादों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। इस नाते कंपनी ने खरीद घटाकर 30 से 31 लाख लीटर कर दी है। दूध एवं उत्पादों की बिक्री कम है इसलिए कपंनी मिल्क पाउडर तो बना रही है लेकिन पाउडर बनाने की भी एक निश्चित क्षमता है तथा कंपनी का मिल्क पाउडर बनने का प्लांट भी उत्तर प्रदेश में है।
कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ जोकि मार्च के आरंभ में किसानों से 11 से 11.50 लाख लीटर दूध की दैनिक खरीद कर रहा था, इस समय केवल 8 से 8.50 लाख लीटर दूध की खरीद ही कर रहा है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दूध एवं उत्पादों की बिक्री काफी कम हो गई है, जिस कारण दूध की खरीद में कटौती करनी पड़ी है।

दूध की खरीद कीमतों में भी कमी की

हरियाणा मिल्क फूड लिमिटेड के मैनेजर मार्केटिंग संजय गांधी ने बताया कि लॉकडाउन के कारण दूध उत्पादों की बिक्री में भारी गिरावट आई है, जिस कारण हमें दूध के खरीद भाव में कमी करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि महीने भर में हमने दूध खरीद की कीमतों में 14 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। पहले हम किसानों से 48 रुपये प्रति लीटर (6.5 फीसदी एसएनएफ और 8.50 फीसदी पाउडर) की दर पर दूध की खरीद कर रहे थे जबकि इस समय 34 रुपये प्रति लीटर दूध खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि दूध उत्पादों की बिक्री 35 से 40 फीसदी तक घट गई है। मांग कम होने के कारण महीने भर में घी की कीमतों में 70 रुपये और मिल्क पाउडर की कीमतों में 40 से 50 रुपये प्रति किलो का मंदा आ चुका है। दूध उत्पादों की बिक्री कम होने से हमारे पास घी और पाउडर का स्टॉक भी लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि कंपनी किसानों से प्रतिदिन 5 से 6 लाख लीटर दूध की खरीद कर रही है।

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दुग्ध उत्पादन में 75% हिस्सेदारी लघु, सीमांत और भूमिहीन किसानों की

कोरोना वायरस को लेकर सरकार द्वारा किए गए लॉकडाउन के चलते लघु उद्योग-धंधे व व्यापार बंद होने का असर दूध कारोबार पर भी पड़ रहा है। ढाबे, मिष्ठान भण्डार, मावा फैक्ट्रियां बंद होने से देश का दूध कारोबार लगभग ठप सा हो गया है। लगभग 18 करोड़ टन दूध उत्पादन के साथ भारत विश्व का 20 फीसदी उत्पादन करता है और पिछले दो दशकों से पहले स्थान पर बना हुआ है। दुग्ध उत्पादन में लगभग 75 फीसदी हिस्सेदारी लघु, सीमांत और भूमिहीन किसानों की है तथा लॉकडाउन के कारण उनके लिए दूध बेच पाना मुश्किल हो गया है। देश में करीब 10 करोड़ डेयरी किसान हैं यानी लगभग 50 करोड़ लोग दुग्ध उत्पादन से होने वाली आमदनी पर निर्भर हैं।

(साभार-आउटलुक)

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