पशु चिकित्सा क्षेत्र में ‘क्रांति’ की पुकार: VCI से National Veterinary Commission की ओर एक अनिवार्य कदम

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पशु चिकित्सा क्षेत्र में ‘क्रांति’ की पुकार: VCI से National Veterinary Commission की ओर एक अनिवार्य कदम

A Call for ‘Reform’ in Veterinary Regulation: From VCI to a National Veterinary Commission

प्रस्तावना: परिवर्तन के मुहाने पर खड़ा पशु चिकित्सा क्षेत्र

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य (One Health) की रीढ़ माने जाने वाला पशु चिकित्सा क्षेत्र आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। यहाँ ज़ूनोटिक रोगों की रोकथाम, पशुधन विकास और सुरक्षित खाद्य श्रृंखला में वेटरनरी पेशेवरों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन बदलते समय और नई चुनौतियों के बीच वर्तमान नियामक ढाँचे को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की आवश्यकता स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है।

बदलते समय की मांग: संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता

जैसे चिकित्सा क्षेत्र में व्यापक सुधार के उद्देश्य से Medical Council of India (MCI) के स्थान पर National Medical Commission (NMC) का गठन किया गया, उसी प्रकार वेटरनरी क्षेत्र में भी एक आधुनिक, उत्तरदायी और भविष्य-दृष्टा नियामक व्यवस्था की आवश्यकता सामने आई है। यह समय केवल “नियमन” (Regulation) तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि “नेतृत्व”, “नवाचार” और “गुणवत्ता-सुधार” को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने का है।

इसी परिप्रेक्ष्य में, Veterinary Council of India (VCI) की भूमिका को और सुदृढ़, पारदर्शी और पेशेवरों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने अथवा उसे एक National Veterinary Commission (NVC) जैसे अधिक व्यापक और आधुनिक ढाँचे में पुनर्गठित करने पर गंभीर विचार-विमर्श की आवश्यकता है। यह विमर्श नीतिगत स्तर पर, तथ्यों और व्यापक हित को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

VCI की वर्तमान कार्यप्रणाली पर उभरती चिंताएँ

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वेटरनरी समुदाय के विभिन्न वर्गों में समय-समय पर कुछ प्रमुख मुद्दों को लेकर चर्चा होती रही है, जिनके बारे में प्रोफेशनल मंचों और अनौपचारिक संवादों में चिंताएँ व्यक्त की जाती हैं। इन चिंताओं को संतुलित एवं सकारात्मक रूप से सुधार के अवसर के रूप में देखना आवश्यक है:

  • निर्णय-प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा:
    कई वेटरनरी पेशेवर यह महसूस करते हैं कि महत्वपूर्ण नीतिगत और प्रशासनिक निर्णयों में और अधिक खुलापन, संवाद और सार्वजनिक सूचना की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे संस्थागत विश्वास और मजबूत हो सके।
  • लोकतांत्रिक मूल्यों की सुदृढ़ता की मांग:
    चुनावों एवं प्रतिनिधित्व से जुड़ी प्रक्रियाओं के संदर्भ में कुछ सदस्यों ने बेहतर तकनीकी व्यवस्था, स्वतंत्र ऑडिट और स्पष्ट दिशानिर्देशों की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि सभी पक्षों को प्रक्रिया की निष्पक्षता पर पूर्ण विश्वास हो।
  • निर्णय‑प्रक्रिया में व्यापक भागीदारी की आवश्यकता:
    यह धारणा व्यक्त की जाती रही है कि निर्णय‑निर्माण में अधिक से अधिक राज्यों, संस्थानों और कार्यक्षेत्रों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो, जिससे “कुछ लोगों तक सीमित” होने की आशंका समाप्त हो और सामूहिक स्वामित्व की भावना मजबूत हो।
  • शैक्षणिक स्वायत्तता और गुणवत्ता को सुदृढ़ करना:
    वेटरनरी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के संदर्भ में यह अपेक्षा की जाती है कि कुलपतियों एवं अन्य शीर्ष पदों के चयन में पारदर्शी, मेरिट‑आधारित एवं स्वतंत्र प्रक्रिया को और अधिक संस्थागत रूप दिया जाए, ताकि शैक्षणिक उत्कृष्टता और स्वायत्तता दोनों का संरक्षण हो सके।

इन बिंदुओं को किसी प्रकार के आरोप के रूप में नहीं, बल्कि पेशेवर समुदाय द्वारा उठाई गई नीतिगत चिंताओं के रूप में देखा जाना चाहिए, जिनका उद्देश्य सुधार, संवाद और संस्थागत मजबूती है।

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National Veterinary Commission (NVC): एक आधुनिक समाधान की परिकल्पना

उपर्युक्त चुनौतियों और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, कई विशेषज्ञ और वेटरनरी पेशेवर एक National Veterinary Commission (NVC) जैसे आधुनिक ढाँचे की परिकल्पना रखते हैं। प्रस्तावित NVC के कुछ संभावित स्तंभ इस प्रकार हो सकते हैं:

स्तंभ विशेषता अपेक्षित लाभ
डिजिटल गवर्नेंस प्रक्रियाओं का पूर्णतः ऑनलाइन, ट्रैक करने योग्य और ऑडिट योग्य होना पारदर्शी, त्वरित और सुगम प्रशासन
विकेंद्रीकृत ढांचा विभिन्न क्षेत्रों, संस्थानों और विशेषज्ञताओं का प्रतिनिधि ढांचा संतुलित, सहभागी और सर्वसमावेशी निर्णय‑प्रक्रिया
स्वतंत्र चुनाव प्रणाली सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत और थर्ड‑पार्टी ऑडिटेड मतदान व्यवस्था लोकतांत्रिक विश्वास और वैधता में वृद्धि
मेरिट‑आधारित चयन कुलपतियों एवं शीर्ष शैक्षणिक पदों का योग्यता, अनुभव और पारदर्शी मानदंडों पर चयन शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार व स्वायत्तता को बढ़ावा
जवाबदेही तंत्र सुदृढ़ शिकायत निवारण (Grievance Redressal) और फीडबैक प्रणाली पेशेवर अधिकारों की सुरक्षा और संस्थागत उत्तरदायित्व में वृद्धि

ऐसा कोई भी ढांचा तभी सफल होगा, जब इसे व्यापक परामर्श, विधिक प्रक्रिया, विशेषज्ञों की राय और सभी हितधारकों—पशु-चिकित्सकों, अकादमिक संस्थानों, सरकार और पेशेवर संगठनों—की सक्रिय भागीदारी के साथ तैयार किया जाए।

निष्कर्ष: One Health लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में सुधार का एजेंडा

पशु चिकित्सा सेवाएँ केवल पशुओं के उपचार तक सीमित नहीं हैं; यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण, खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ी हुई हैं। यदि भारत को वैश्विक मानकों पर अग्रणी भूमिका निभानी है, तो हमें नियामक प्रणालियों को समयानुकूल, पारदर्शी, विज्ञान‑समर्थित और सहभागी बनाना होगा।

VCI की सुदृढ़ता या उसे National Veterinary Commission जैसे आधुनिक मॉडल में रूपांतरित करने की चर्चा केवल “नाम बदलने” की बहस नहीं, बल्कि इस पेशे के सम्मान, गुणवत्ता, विश्वसनीयता और भविष्य के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का विषय है। अब समय आ गया है कि:

  • वेटरनरी समुदाय की रचनात्मक एवं नीति‑स्तर की आवाज़ को सुना जाए,
  • सुधार को संघर्ष नहीं, साझेदारी और संवाद की प्रक्रिया माना जाए,
  • और एक ऐसा ढांचा तैयार किया जाए जो One Health के सिद्धांतों के अनुरूप मजबूत, सक्षम और दूरदर्शी हो।
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“एक सशक्त, पारदर्शी और उत्तरदायी नियामक ढांचा ही एक सशक्त वेटरनरी प्रोफेशन की नींव है।”

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह लेख केवल नीतिगत विमर्श और पेशेवर सुधारों पर विचार‑प्रस्ताव के रूप में लिखा गया है। इसमें व्यक्त विचार लेखक/लेखकों के निजी एवं वैचारिक मत हैं, जिन्हें किसी संस्था, परिषद, विश्वविद्यालय या संगठन के विरुद्ध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आरोप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। लेख में उल्लिखित उदाहरण और संदर्भ सार्वजनिक विमर्श, पेशेगत अनुभव और व्यापक हित के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किए गए हैं। पाठकों से अपेक्षा है कि वे इन बातों को स्वतंत्र विश्लेषण, संवाद और सुधार‑केन्द्रित चर्चा का आधार मानें, न कि किसी प्रकार के अंतिम तथ्यात्मक निष्कर्ष या कानूनी अभिकथन के रूप में।

 

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