दुधारू पशुओ में सेक्सड सीमेन द्वारा कृत्रिम गर्भाधान : भारतीय परिपेक्ष्य में उपयोगिता एवं महत्व

0
1373

दुधारू पशुओ में सेक्सड सीमेन द्वारा कृत्रिम गर्भाधान : भारतीय परिपेक्ष्य में उपयोगिता एवं महत्व

डॉ अमन श्रीवास्तव, डॉ हर्षित सरोहा, डॉ शाम्भवी, डॉ अखिल पटेल, डॉ अतुल कुमार वर्मा एवं डॉ विजय सिंह

मादा पशु रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय,

सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्राद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ-250110 उत्तर प्रदेश

 

पशुओ में कारगर आनुवांशिक सुधार की विभिन्न प्रजनन तकनीकियाँ जैसे कि कृत्रिम गर्भाधान,एकाधिक ओव्यूलेशन और भ्रूण स्थानांतरण और इन-विट्रो भ्रूण उत्पादन आदि है,फिर भी कृत्रिम गर्भाधान सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाली अनुवांशिक सुधार की तकनीकि है। परंपरागत वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान करने से नर और मादा संतति पैदा होने कि संभावना 50-50% रहती है जबकि सेक्सड सोर्टेड सीमेन (लिंग वर्गीकृत वीर्य) से हम एक ही प्रकार की संतति प्राप्त होने कि संभावना 95% तक होती है। यदि हम मादा वर्गीकृत वीर्य का प्रयोग करते हुए कृत्रिम गर्भाधान करे है तो 95% तक उम्मीद रहेगी कि मादा संतति ही प्राप्त होगी, जोकि हमारे दुग्ध व्यवसाय के लिए आज के दौर में अत्यंत उपयोगी साबित होगी। आज के कृषि अभियांत्रिकी के दौर में नर पशुओ का उपयोग न के बराबर रह गया है। अतः पशुपालक भाई इन्हे खुला छोड़ देते है जिससे ये किसानो कि फसलों को ख़राब कर देते है और उनकी आबादी इतनी बढ़ गयी है कि सड़को पर उनका जमघट लगा रहता है जोकि दुर्घटना का कारण बनती जा रही है। सरकार ने बढ़ते नर गोवंश मद्देनजर इनकी संख्या को लिंक वर्गीकृत वीर्य तकनीकि से कम करने की योजना बनाई है। इसके अंतर्गत सेक्सड सॉर्टेड सीमेन टेक्नोलॉजी यानि लिंग वर्गीकृत वीर्य तकनीकि के जरिये नर बछड़ो के जन्म दर को अत्यंत कम कर मादा बछड़ो के  जन्म दर बढ़ाया जा सकेगा।

सर्वविदित है की भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है अतः भारत इस तकनीकि से अत्यधिक लाभान्वित हो सकता है। हाल में ही सम्पन्न हुई बीसवीं पशुधन गणना-2019 में 2012 की तुलना में पशुधन 4.6% की वृद्धि देखी गई है, जिससे पशुधन की कुल संख्या 535.78 मिलियन हो गई है।

READ MORE :  Healthy Paws Jaipur: Student Wing of the Veterinary Association of India Leads Rabies Vaccination Drive for Community Dogs

यह भविष्यवाणी की गई है कि बढ़ती आबादी और त्वरित आर्थिक विकास के साथ, दूध और दूध उत्पादों की मांग नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए बाध्य होगा । ऐसी बढ़ती अर्थव्यवस्था में, पशुपालकों को स्थिति का लाभ उठाने और उत्पादकों और उपभोक्ताओं के पारस्परिक लाभ की मांग को पूरा करने के लिए इस नई तकनीकि का भरपूर फायदा उठाना होगा।

एक लाभदायक डेयरी फार्मिंग दूध व्यवसाय के लिए, उचित प्रजनन प्रबंधन पर इसका अधिक महत्व है। इसके लिए जरुरी है कि अधिकतम संख्या में मादा बछड़े पैदा हों तथा हर साल अधिक से अधिक मादा गायों का उत्पादन होता रहे। यह केवल सेक्सड सॉर्टेड सीमेन की मदद से आसानी से किया जा सकता है.

 

सेक्सड वीर्य क्या है और उसकी आवश्यकता क्यों है?

 

साँड़ वीर्य में दो तरह के शुक्राणु होते हैं, X और Y जो की लगभग बराबर अनुपात में होते है। Y शुक्राणु से नर तथा X शुक्राणु से मादा संतान पैदा होते है जिस वजह से नर बछड़ा या मादा बछिया होने की संभावना 50% रहती है और सेक्सड सॉर्टेड सीमेन टेक्नोलॉजी में  प्रयोगशाला में Y शुक्राणु का वीर्य से हटा दिया जाता है जिससे मादा बछिया होने की संभावना 90% से अधिक हो जाती है इस प्रकार की वीर्य को लिंक वर्गीकृत वीर्य अथवा सेक्सड सॉर्टेड सीमेन कहते है। आमतौर में गायो में परंपरागत वीर्य से कृतिम गर्भाधान किया जाता है तो मादा बछिया के होने की संभावना 50% होती है लकिन सेक्सड सॉर्टेड सीमेन के उपयोग से मादा बछिया होने की संभावना 95% तक तक हो जाती है। इस प्रकार से सेक्सड सॉर्टेड सीमेन से न केवल बछड़ो की संख्या नियंत्रित रहेगी बल्कि अधिक संख्या में  बछिया पैदा होने से किसानो की आय में भी वृद्धि होगी । वांछित लिंग का बछड़ा प्राप्त करना आर्थिक रूप से मूल्यवान हो सकता है। कृषि और परिवहन के मशीनीकरण के कारण, सांडो या बैलों की अब आवश्यकता इसके लिए नहीं है और दूध उत्पादन के लिए किसानों द्वारा केवल मादा बछड़ों को रखा जाता है। वीर्य सेक्सिंग तकनीक में सुधार मूल्य में भी कमी ला सकता है और निषेचन से सफलता दर में भी वृद्धि हो सकती है।

READ MORE :  गाय से प्रतिवर्ष एक बच्चा प्राप्त कर उसकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि हेतु अत्यंत उपयोगी जानकारी

इससे न केवल आर्थिक रूप से पशुपालकों को लाभ होगा, कई बार, नर बछड़ों को आनुवंशिक रूप से बेहतर बैल का उपयोग करके एक आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम को तेजी से लागू करने की कोशिश हो सकती है।

 

सेक्सड सॉर्टेड सीमेन का प्रयोग करने में चुनौतियां?

 

1)  सेक्सड सॉर्टेड मशीनो को संचालित करने के लिए अत्यधिक कुशल व्यक्ति की आवश्यकता होती है2)  लिंग वर्गीकृत वीर्य मशीन की क्षमता एवं गति दोनों कम है जिसे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है3)  विदेशी तकनीकि होने के कारण सेक्सड सॉर्टेड सीमेंट मशीन की लागत बहुत अधिक होती है।  4)  लिंग वर्गीकृत वीर्य को कम तापमान पर संरक्षित करना परम्परगत वीर्य की तुलना में कठिन होता है क्योंकि लिंग वर्गीकृत वीर्य में ठंड को सहन करने की क्षमता कम होती है। 5)  सेक्सड सॉर्टेड सीमेन की लागत 1500 – 4500 रुपये है जबकि परम्परगत वीर्य की लागत 15 -20 रुपये से ज्यादा है।6)  सेक्सड सॉर्टेड सीमेन के साथ गर्भाधान दर परम्परगत वीर्य की तुलना में 10 -15 % कम होती है। 7)  वीर्य की लिंग चयन की प्रकिया में शुक्राणुओं की हानि भी अधिक हो जाती है, जिससे उच्च प्रजनन क्षमता वाले सांड का पूर्ण सदुपयोग करने में बाधा है।

 

पशुओ में सेक्सड सीमेन के लाभ

1.  यह तकनीकि भारत में डेयरी फार्मिंग के लिए आनुवांशिक रूप से बेहतर गायों से मादा गायों का उत्पादन करने में मदद कर सकती है।2.  इससे डेयरी किसानों को आगे प्रजनन के उद्देश्य के लिए बेहतर जीन वाले बैल को बनाये रखने में मदद मिल सकती है।

READ MORE :  Apartments Pet Rules – Rights & Responsibility of Pet Owners in Housing Societies

1.  लिंग वर्गीकृत वीर्य की मदद से पशुपालक अपने मादा पशुओ की संख्या तेजी से बढा सकते हैं। इसके अलावा, यह तकनीक अवांछित नर डेयरी बछड़ों की संख्या को कम करने में मदद करती है।2.  किसानो के खेतों में आये दिन देखने को मिलता है कि आवारा नर पशु पूरी की पूरी फसल ख़राब कर देते तथा सड़को पर इनका जमावड़ा लगा रहता है।  इस तकनीकि की मदद से नर संतानों की आबादी को नियंत्रित किया जा सकता है और इस प्रकार उपरोक्त समस्या का काफी हद तक समाधान किया जा सकता है।

  1. लिंग वर्गीकृत वीर्य के उपयोग से हम संतति परीक्षण (प्रोजेनी टेस्टिंग )की दक्षता को भी बढा सकते हैं।
  2. यह पशुओ की संख्या बढ़ाने का एक अच्छा एवं सस्ता तरीका हो सकता है , जबकि बाहर से पशुओ को खरीदकर लाना मॅहगा भी पड़ेगा साथ साथ बाहर से बीमारियों के आने का भी जोखिम भी रहेगा।

पशुओ में सेक्सडवीर्य का उपयोग करना कितना सुरक्षित है?

कृत्रिम गर्भाधान के लिए वर्गीकृत वीर्य का उपयोग करना पूरी तरह सुरक्षित है। फिर भी प्रत्येक वीर्य स्ट्रॉ में शुक्राणुओ की संख्या , जो कि पारम्परिक वीर्य स्ट्रॉ कि तुलना में बहुत कम होता है , साथ साथ वर्गीकरण प्रक्रिया खुद शुक्राणुओ को हानि पहुँचाती है।  यह देखा गया है कि पारम्परिक वीर्य कि तुलना में वर्गीकृत वीर्य के साथ गर्भाधान दर 10 -15 % कम होती है।

Please follow and like us:
Follow by Email
Twitter

Visit Us
Follow Me
YOUTUBE

YOUTUBE
PINTEREST
LINKEDIN

Share
INSTAGRAM
SOCIALICON