विश्व पशु कल्याण दिवस-4 अक्टूबर

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विश्व पशु कल्याण दिवस-4 अक्टूबर

 

डॉ जितेंद्र सिंह, पशु चिकित्सा अधिकारी, कानपुर देहात, पशुपालन विभाग, उत्तर प्रदेश

प्रत्येक वर्ष 4 अक्टूबर को विश्व पशु कल्याण दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है यह दिवस पशुओं के महान संरक्षक सेंट फ्रांसिस के जन्मदिवस के अवसर पर पूरे विश्व में मनाया जाता है । विश्व स्तर पर विश्व के बुद्धिजीवियों ने पशुओं पर हो रहे अत्याचार और उनके संरक्षण के लिए यह दिवस मनाना प्रारंभ किया था इसे पशु प्रेमी दिवस भी कहा जाता है पूरे विश्व में मानवता के संरक्षण और संवर्धन में पशुओं का खास योगदान है आज मानव के समृद्धि में एक प्रमुख कारक है प्राकृतिक आपदाओं से जहां मनुष्य खुद को किसी तरह से बचा लेता है लेकिन वह पशुओं को नहीं बचा पाता है उन्हें दोयम दर्जे का प्राणी मान कर छोड़ दिया जाता है इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए यह दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है भारत में पशु क्रूरता अधिनियम 1835 और पशु संरक्षण अधिनियम 1911 पशुओं के संरक्षण के लिए प्रमुख कानून है ।
4 अक्टूबर को हम “विश्व पशु कल्याण दिवस” मानते हैं ,यह एक अन्तराष्ट्रीय दिवस है| यह दिन असीसी केसेंट फ्रांसिस का जन्मदिवस भी है जो कि जानवरों के महान संरक्षक थे| विश्व पशु कल्याण दिवस मनाने की शुरुआत 1931 ईस्वी में परिस्थिति विज्ञानशास्रीयों के सम्मलेन में इटली के शहर फ्लोरेंस में की गयी थी | यूनाइटेड नेशंस ने “पशु कल्याण पर एक सार्वभौम घोषणा” के नियम एवं निर्देशों के अधीन अनेक अभियानों की शुरुआत की| नैतिकता की दृष्टि से, संयुक्त राष्ट्र नें अपने सार्वभौम घोषणा में पशुओ के दर्द और पीड़ा के सन्दर्भ में उन्हें संवेदनशील प्राणी के रूप में पहचान देने की बात की कही । | इस दिवस का मूल उद्देश्य विलुप्त हुए प्राणियों की रक्षा करना और मानव से उनके संबंधो को मजबूत करना था. साथ ही पशुओ के कल्याण के सन्दर्भ विश्व पशु कल्याण दिवस का आयोजन करना था. हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक “गौमाता” की हत्या पर हो पूर्ण पाबन्दी हो.

विश्व पशु कल्याण दिवस का उद्देश्य:-

विश्व पशु कल्याण दिवस का मूल उद्देश्य पशु कल्याण मानकों में सुधार करना, और व्यक्तियों,समूह, और संगठनों का समर्थन प्राप्त करना और जानवरों के प्रति प्यार प्रकट करना ताकि उनका जीवन सक्षम और बेहतर हो सके. इस कारण से यह दिवस “पशु प्रेमी दिवस” के रूप में जाना जाता है. यद्यपि यह एक बेहतरीन दिवस विश्व भर के लोगो का जानवरों के प्रति प्यार प्रकट करने का महत्वपूर्ण दिवस है, लेकिन इस दिवस के उजागर होने के पीछे भी कई कारण जिम्मेदार हैं. इन सभी तथ्यों में जानवरों के प्रति प्रकट किये जाने वाले घृणास्पद व्यवहार, आवारा कुत्तों और बिल्ल्लियों के प्रति व्यवहार, उनका अमानवीय व्यापार आदि भी प्रमुख कारण थे. इसके अलावा किसी प्राकृतिक आपदा के समय भी इन जानवरों के प्रति दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता था और उनकी सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरती जाती थी.

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विश्व पशु कल्याण दिवस समारोह:-

विश्व पशु कल्याण दिवस वास्तव में एक महत्वपूर्ण दिवस है. यह विविध माध्यमों से हमें कई चीजो को याद दिलाता है जिसमे जानवर हमारे जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि करते हैं. इस दिवस को ढेर सारे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. अर्थात जैसे विश्व पशु कल्याण अभियान, पशुओं के लिए बचाव आश्रयों का उद्घाटन, और फंड जुटाने से सम्बंधित कार्यक्रमों का आयोजन इत्यादि. इसके अलावा स्कूल और कालेजों में भी वन्य जीवों से जुडी ढेर सारी जानकारियों को टीवी और कंप्यूटर के माध्यम से साझा किया जाता है. इसके अलावा कई संगठनों के द्वारा जानवरों के लिए आश्रय के निर्माण का कार्यक्रम भी को स्वयंसेवको के द्वारा प्रायोजित किया जाता है..

पशु कल्याण के लिए कानून:-

पशु कल्याण के लिए अनेकों कानूनों और अधिनियमों की भी व्यवस्था की गयी है. जैसे- “पशु क्रूरता अधिनियम 1835” जोकि विश्व में जानवरों के सन्दर्भ में प्रथम अधिनियम है जिसकी स्थापना ब्रिटेन में की गयी थी. इसके पश्चात “पशुसंरक्षण अधिनियम 1911” प्रकाश में आया. जिसके परिणामस्वरूप जानवरों की रक्षा के लिए “पशु कल्याणअधिनियम, 1966″ नामक अमेरिकी राष्ट्रीय क़ानून प्रकाश में आया. भारत में, पशुओं की सुरक्षा के लिए “जानवरों के प्रति क्रूरता की रोकथाम अधिनियम 1960 ″ को लाया गया.यह वर्ष 1965 का समय था जब ब्रिटेन सरकार नें जानवरों के कल्याण के लिए एक जांच अभियान शुरू किया था. इस अभियान के प्रमुख अन्वेषक प्रोफेसर रोजर ब्राम्बेल थे. यह अभियान रुथ हैरिसन की किताब “एनिमल मशीन” मे उठायी गयी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया था. इस किताब क प्रकाशन 1964 में किया गया था. इस सन्दर्भ में प्रोफेसर रोजर ब्राम्बेल नें अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की. इस रिपोर्ट के आधार पर ब्रिटेन की सरकार नें सन 1967 में“ एनिमल वेलफेयर एडवाइजरी समिति” की स्थापना की. बाद में यह समिति वर्ष 1979 “फार्म एनिमल वेलफेयर कौंसिल” में परिवर्तित हो गयी. इस समिति के प्रथम दिशा-निर्देशों के अनुसार यह कहा गया कि सर्वप्रथम जानवरों को सोने और खड़े होने की स्वतंत्रता होनी चाहिए. साथ ही उन्हें घुमाने और विचरण करने की भी स्वतंत्रता होनी चाहिए. इसके अलावा भी इस समिति नें कुछ दिशा-निर्देशों को दिया जिसे फाइव फ्रीडम के नाम से भी जाना जाता है. ब्रिटेन में, ‘पशु कल्याण अधिनियम 2006 ” नें पशु कल्याण के सन्दर्भ में अनेक समेकन का कार्य किया. इसके बाद अनेक संगठनों नें यूनाइटेड नेशंस (पशु कल्याण पर एक सार्वभौम घोषणा) के दिशा-निर्देशों के अधीन अनेक अभियानों को प्रारंभ किया. नैतिकता की दृष्टि से, संयुक्त राष्ट्र नें अपने सार्वभौम घोषणा में पशुओ के दर्द और पीड़ा के सन्दर्भ में उन्हें संवेदनशील प्राणी के रूप में पहचान देने की बात की. इसके पश्चात उसने यह भी कहा की जानवरों के सन्दर्भ में किये जाने वाले सभी कल्याणकारी कार्य समाज सेवा के रूप में हैं. इसे न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी फैलाया जाना चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति के कर्तव्यों में शामिल किया जाना चाहिए. पशुओ के कल्याणकारी कार्यों के सन्दर्भ में किये जाने वाले कार्य विविध महत्वपूर्ण संगठनो के सहयोग से किया जाना चाहिए. साथ ही पशु कल्याण से संबंध रखने वाली सभी गैर सरकारी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाना चाहिए.

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पशुपालन विभाग द्वारा पशु कल्याण पखवाडा:

पशुपालन विभाग द्वारा पशु कल्याण पखवाडा आयोजित किया जाता है.इस दौरान बांझ निवारण, पशु शल्य चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाता है. । शिविरों के दौरान पशु क्रूरता की रोकथाम एवं लाभान्वित पशु पालकों व जीव जन्तु कल्याण से संबंधित कार्यो की प्रगति की जानकारी भी उपलब्ध करायी जातीहै । विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं, गौशालाओं में चेतना शिविर, गोष्ठियों एवं पशु कल्याण जन जागृति रैलियों का आयोजन किया जाता है । इन दिवसों में समस्त राज्य में पशु-पक्षियों का वध करना एवं मांस आदि की बिक्री पर अनिवार्य रूप से प्रतिबंध रहता है । इस कार्यक्रम में जिला एवं ग्रामीण स्तर पर कार्यरत स्वयं सेवी संस्थाओं तथा गैर सरकारी संस्थाओं की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाती है ।शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से जीव जन्तुओं के प्रति कू्ररता निवारण पर आधारित व्याख्यानों के माध्यम से जानकारी दी जाती है तथा संबंधित विषय पर चित्रकला एवं वाद-विवाद प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है ।
यह एक बेहतरीन दिवस विश्व भर के लोगो का जानवरों के प्रति प्यार प्रकट करने का महत्वपूर्ण दिवस है, लेकिन इस दिवस के उजागर होने के पीछे भी कई कारण हैं | जहाँ पशुओं की वीभिन्न प्रजातियों के विलुप्त होने से बचाने और उनकी रक्षा करने की बात है वहीँ हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि हम पशुओं पर क्रूरता करने से बचें | इस दिवस का मूल उद्देश्य विलुप्त हुए प्राणियों की रक्षा करना और मानव से उनके संबंधो को मजबूत करना था साथ ही पशुओ के कल्याण के सन्दर्भ विश्व पशु कल्याण दिवस का आयोजन करना है| ताकि उनके प्रति संवेदना स्थापित करने के साथ साथ पशुओं की हत्या और क्रूरता पर रोक लगायी जा सके |

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गोहत्या पर पूरे देश में पूर्ण पाबन्दी लगायी जाये:-

सुरभे त्वांजगत्माता देवी विष्णु पदे स्थिता।
ग्रासं ग्रहाण मद्दत्तं गौर्मातस्त्रातुमर्हसि॥
एक गाय की महिमा से शायद ही कोई भारतवासी अछूता है| वैदिक काल में गायों की संख्या व्यक्ति की समृद्धि का मानक हुआ करती थी। कृष्ण के गाय प्रेम को भला कौन नहीं जानता। इसी कारण उनका एक नाम गोपाल भी है। ऐसी मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 करोड़ देवताओं का निवास है। यही कारण है कि दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर गायों की विशेष पूजा की जाती है| प्राचीन काल से यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। चाहे वह दूध का मामला हो या फिर खेती के काम में आने वाले बैलों का। गाय का घी और गोमूत्र भी अनेक आयुर्वेदिक औषधियां बनाने के काम भी काम आता है। गाय का गोबर फसलों के लिए सबसे उत्तम खाद है। गाय को मां के बराबर कहा जाता है इसी कारण इतिहास के ऐसे बहुत सारे राजा हैं जिन्होंने अपने कार्यकाल में गौ-वध पर पाबंदी लगाई थी। महाराजा रणजीत सिंह ने अपने शासनकाल के दौरान राज्य में गौहत्या पर मृत्युदंड का कानून बनाया था। पंडित मदन मोहन मालवीयजी ने कहा है: ’यदि हम गौओं की रक्षा करेंगे तो गौएँ भी हमारी रक्षा करेंगी|’ आज के दिन यानि विश्व पशु कल्याण दिवस पर हम सभी को गंभीरता से विचार करना होगा ताकि हमारी ‘आस्था’ और ‘अर्थव्यवस्था’ के प्रतीक गोवंश को बचाया जा सके।

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