अभाव काल (ग्रीष्मकाल) के लिए चारे का वैज्ञानिक संरक्षण

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     अभाव काल (ग्रीष्मकाल) के लिए चारे का वैज्ञानिक संरक्षण

           डॉ. प्रबुद्ध दुबे¹* एवं डॉ. अरुणिमा सिंह²

    ¹ पशु प्रजनन, मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय (COVAS), मेरठ-250110

   ² पशु विकृति विज्ञान विभाग, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (डुवासु) मथुरा – 281001, उत्तर प्रदेश

              *संपर्क लेखक: prabuddhdubey16@gmail.com

पशुपालन व्यवसाय में पशुपोषण का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए वैज्ञानिक आहार प्रबंधन आवश्यक है। सामान्यतः सर्दी एवं बरसात के मौसम में हरा चारा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहता है, लेकिन ग्रीष्मकाल (अभाव काल) में हरे चारे की भारी कमी हो जाती है। ऐसे समय में किसान प्रायः धान या गेहूँ के भूसे पर निर्भर रहते हैं, जिसमें प्रोटीन की मात्रा केवल लगभग 4 प्रतिशत होती है। भूसे की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए यूरिया उपचार एक सरल एवं प्रभावी तकनीक है, जिससे इसकी प्रोटीन मात्रा लगभग 9 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है।

भूसे का यूरिया उपचार (Urea Treatment)

  1. 100 किलोग्राम भूसे के लिए 4 किलोग्राम यूरिया को 40 लीटर पानी में अच्छी तरह घोलें।
  2. भूसे को पक्के अथवा कच्चे फर्श पर प्लास्टिक शीट बिछाकर 3–4 इंच मोटी परत में फैलाएँ।
  3. प्रत्येक परत पर यूरिया का घोल समान रूप से छिड़कें तथा भूसे को पैरों से अच्छी तरह दबाएँ।
  4. इस प्रक्रिया को 100 किलोग्राम भूसे की परतों में लगभग 10 बार दोहराएँ।
  5. अंत में पूरे ढेर को प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढक दें तथा किनारों को मिट्टी या गोबर से लीप दें, ताकि हवा अंदर न जा सके।
  6. सर्दियों में 28 दिन तथा गर्मियों में 21 दिन बाद इसे खोलें। पशुओं को खिलाने से लगभग 10 मिनट पहले खुले वातावरण में रखें, ताकि अमोनिया गैस निकल जाए।
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साइलेज (Silage) बनाने की विधि

ग्रीष्मकाल के अभाव काल में हरे चारे के विकल्प के रूप में साइलेज सर्वोत्तम माना जाता है। इसे ज्वार, मक्का, बाजरा तथा नेपियर घास से बनाया जा सकता है।

  1. चारे को फूल आने की अवस्था में काटकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
  2. एक घनमीटर के गड्ढे में लगभग 5 क्विंटल चारा अच्छी तरह दबाकर भरें। हवा निकालना आवश्यक है।
  3. गड्ढे को जमीन की सतह से लगभग 1 फुट ऊपर तक भरने के बाद प्लास्टिक शीट से ढक दें तथा ऊपर मिट्टी डालकर अच्छी तरह लीप दें।
  4. लगभग 40–45 दिनों में साइलेज तैयार हो जाता है। खोलने के बाद आवश्यकता के अनुसार ही साइलेज निकालें।

हे (Hay) बनाने की विधि

मुलायम तने वाली घासों, जैसे जई एवं लूसर्न, को सुखाकर हे (Hay) बनाया जाता है।

  1. हरी फसल काटकर 5–10 किलोग्राम के बंडल बना लें।
  2. इन बंडलों को खड़ा करके धूप में सुखाएँ, जिससे नमी पूरी तरह निकल जाए।
  3. सुखाने के दौरान बंडलों की स्थिति समय-समय पर बदलते रहें, ताकि वे सभी ओर से समान रूप से सूख सकें।

उपरोक्त तकनीकों को अपनाकर पशुपालक अभाव काल में भी पशुओं के लिए पौष्टिक चारा उपलब्ध करा सकते हैं। इससे पशुओं का दुग्ध उत्पादन स्थिर बना रहता है तथा आहार पर होने वाला खर्च भी कम होता है।

 

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