गर्भकाल एवं प्रसव के दौरान पशुओं का वैज्ञानिक प्रबंधन

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          गर्भकाल एवं प्रसव के दौरान पशुओं का वैज्ञानिक प्रबंधन

              डॉ. प्रबुद्ध दुबे1* एवं डॉ. अरुणिमा सिंह2

       1पशु प्रजनन, मादा रोग एवं प्रसूति विज्ञान विभाग, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय (COVAS), मेरठ-250110

       2पशु विकृति विज्ञान विभाग, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (डुवासु) मथुरा – 281001, उत्तर प्रदेश

                      *संपर्क लेखक: prabuddhdubey16@gmail.com

गर्भकाल एवं प्रसव का समय पशुपालन व्यवसाय का सबसे संवेदनशील चरण होता है। इस समय मादा पशु का स्वास्थ्य, आहार एवं आवास न केवल उसके अपने शरीर पर, बल्कि बच्चे के विकास तथा अगले ब्यांत के दुग्ध उत्पादन पर भी गहरा प्रभाव डालता है।

गर्भकाल के दौरान सावधानियाँ

  • पशु आवास

गाभिन पशुओं को अन्य जानवरों से अलग एवं शांत स्थान पर रखें। पशुशाला की सफाई, उचित हवादारी तथा फर्श में ढलान सुनिश्चित करें, ताकि मूत्र एवं गंदगी आसानी से बाहर निकल सके।

  • पोषण प्रबंधन

गाभिन पशु को सुरक्षित एवं अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है। प्रतिदिन 5–7 किलोग्राम सूखा चारा, 25–30 किलोग्राम हरा चारा तथा लगभग 3 किलोग्राम संतुलित आहार दें। खनिज मिश्रण एवं नमक की उचित मात्रा अवश्य दें।

  • स्वच्छ जल

गाभिन पशु को प्रतिदिन 80–90 लीटर स्वच्छ एवं ताजा पानी उपलब्ध कराएँ।

  • सामान्य देखभाल

गर्भधारण के 60–90 दिनों के भीतर पशु चिकित्सक से गर्भ की जाँच कराएँ। पशु को चोट, गिरने अथवा अन्य नर पशुओं से बचाएँ। प्रसव से लगभग दो महीने पहले दुहना बंद कर दें (Dry Period) तथा आहार में अचानक परिवर्तन न करें।

प्रसव (ब्याने) के दौरान एवं बाद की देखभाल

  • प्रसव के लक्षण

थनों एवं योनि में सूजन आना प्रसव के प्रारम्भिक लक्षण हैं।

  • प्रसव की विधि
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प्रसव के समय पशु को शांत वातावरण में अकेला रहने दें तथा अनावश्यक छेड़छाड़ न करें। यदि बच्चा फँस जाए अथवा कोई असामान्य स्थिति दिखाई दे, तो तुरंत पशु चिकित्सक को बुलाएँ।

  • प्रसव के बाद सफाई

प्रसव के बाद योनि एवं पूँछ को नीम के गुनगुने पानी अथवा एंटीसेप्टिक घोल से साफ करें।

  • आहार

प्रसव के तुरंत बाद गुड़ का पानी, उबला हुआ बाजरा, तेल मिला हुआ गेहूँ तथा अदरक एवं अजवाइन युक्त सुपाच्य आहार दें।

  • जेर (Placenta)

सामान्यतः जेर 8–10 घंटे के भीतर बाहर निकल जाती है। यदि ऐसा न हो तो पशु चिकित्सक से परामर्श लें। जेर को गहरा गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबा दें तथा अन्य पशुओं को खाने न दें।

अतिरिक्त जानकारी : पशुओं में गर्मी (Heat) के लक्षण

कृत्रिम गर्भाधान के सही समय का निर्धारण करने के लिए पशु में गर्मी के निम्नलिखित लक्षणों की पहचान आवश्यक है—

  • पशु का बार-बार रंभाना तथा बेचैन रहना।
  • पूँछ उठाना तथा बार-बार पेशाब करना।
  • प्रजनन अंगों में सूजन एवं लालिमा होना तथा पारदर्शी, चिपचिपा स्राव निकलना।
  • अन्य पशुओं पर चढ़ने का प्रयास करना।
  • गर्मी के लक्षण प्रारम्भ होने के लगभग 10–12 घंटे बाद पशु का Standing Heat में आना, जिसमें वह अन्य पशुओं को अपने ऊपर चढ़ने देती है।

 

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