जानवरों में टेटनस: कारण, लक्षण, उपचार एवं रोकथाम एक घातक लेकिन पूर्णतः रोकथाम योग्य रोग

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जानवरों में टेटनस: कारण, लक्षण, उपचार एवं रोकथाम एक घातक लेकिन पूर्णतः रोकथाम योग्य रोग

लेखक:
डॉ. प्रशांत तिवारी (Dr. Prashant Tiwari)
Project Research Scientist (Veterinarian)
ICMR–National Institute of Health Research (NIHR), Gorakhpur, Uttar Pradesh

 

परिचय

टेटनस (Tetanus) पशुओं और मनुष्यों में होने वाला एक अत्यंत गंभीर तथा प्रायः घातक संक्रामक रोग है। यह क्लोस्ट्रिडियम टेटानी (Clostridium tetani) नामक जीवाणु के कारण होता है। यह जीवाणु मिट्टी, धूल, गोबर तथा पशुओं के मल में व्यापक रूप से पाया जाता है। इसके बीजाणु (Spores) कई वर्षों तक जीवित रह सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में सक्रिय होकर शक्तिशाली विष (Toxin) उत्पन्न करते हैं, जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर मांसपेशियों में तीव्र अकड़न एवं ऐंठन उत्पन्न करता है।

यद्यपि यह रोग सभी पशुओं में हो सकता है, लेकिन घोड़े, भेड़, बकरी, गाय, भैंस एवं सूअर टेटनस के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। समय पर पहचान और उचित उपचार न मिलने पर यह रोग पशु की मृत्यु का कारण बन सकता है। इसलिए प्रत्येक पशुपालक एवं पशु चिकित्सक के लिए इस रोग की जानकारी अत्यंत आवश्यक है।

टेटनस कैसे फैलता है?

Clostridium tetani एक अवायवीय (Anaerobic) जीवाणु है, जो ऑक्सीजन की कमी वाले वातावरण में तेजी से बढ़ता है।

यह जीवाणु निम्न परिस्थितियों में शरीर में प्रवेश करता है—

  • गहरे या कील/कांटे जैसे पंचर घाव
  • नवजात बछड़ों में संक्रमित नाभि (Umbilical infection)
  • बधियाकरण (Castration)
  • पूँछ काटना (Tail docking)
  • सींग काटना (Dehorning)
  • प्रसव के दौरान जननांगों में चोट
  • कठिन प्रसव (Dystocia)
  • गर्भाशय प्रोलैप्स
  • प्लेसेंटा रिटेन्शन
  • दूषित शल्य उपकरणों का प्रयोग

शरीर में प्रवेश करने के बाद जीवाणु दो प्रकार के विष उत्पन्न करता है—

  • टेटानोलाइसिन (Tetanolysin)
  • टेटानोस्पास्मिन (Tetanospasmin)
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इनमें टेटानोस्पास्मिन सबसे खतरनाक विष है। यह तंत्रिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क एवं मेरुरज्जु तक पहुँचकर मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसों को प्रभावित करता है, जिससे पूरे शरीर में लगातार अकड़न और ऐंठन होने लगती है।

टेटनस के प्रमुख लक्षण

रोग के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर करते हैं।

  1. मांसपेशियों में अकड़न

शुरुआत गर्दन की मांसपेशियों से होती है और धीरे-धीरे पूरा शरीर कठोर होने लगता है। पशु को चलने-फिरने एवं खड़े होने में कठिनाई होती है।

  1. लॉकजॉ (Lockjaw)

जबड़े की मांसपेशियाँ कठोर हो जाती हैं, जिससे पशु मुँह नहीं खोल पाता तथा चारा खाना और पानी पीना कठिन हो जाता है।

  1. तीसरी पलक का बाहर आना

विशेषकर घोड़ों में तीसरी पलक बाहर दिखाई देने लगती है, जो टेटनस का महत्वपूर्ण संकेत है।

  1. कान एवं पूँछ का सीधा हो जाना

मांसपेशियों की कठोरता के कारण कान एवं पूँछ असामान्य रूप से सीधे दिखाई देते हैं।

  1. सॉ-हॉर्स” मुद्रा

घोड़ा चारों पैर फैलाकर कठोर अवस्था में खड़ा रहता है, जिसे Sawhorse Stance कहा जाता है।

  1. साँस लेने में कठिनाई

यदि श्वसन मांसपेशियाँ प्रभावित हो जाएँ तो पशु को साँस लेने में कठिनाई होती है और गंभीर स्थिति में श्वसन विफलता से मृत्यु हो सकती है।

  1. आवाज एवं प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता

हल्की आवाज, स्पर्श या तेज रोशनी से भी मांसपेशियों में तीव्र ऐंठन हो सकती है।

टेटनस का निदान

टेटनस का निदान मुख्यतः पशु के इतिहास एवं नैदानिक लक्षणों के आधार पर किया जाता है। हाल ही में लगी चोट, शल्यक्रिया या प्रसव के बाद उपरोक्त लक्षण दिखाई देने पर टेटनस की संभावना अधिक होती है।

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उपचार

टेटनस एक चिकित्सकीय आपातकाल (Medical Emergency) है। उपचार जितना शीघ्र शुरू किया जाए, पशु के बचने की संभावना उतनी अधिक होती है।

उपचार में शामिल हैं—

  • टेटनस एंटीटॉक्सिन का प्रयोग
  • टेटनस टॉक्सॉइड द्वारा प्रतिरक्षा विकसित करना
  • घाव की अच्छी तरह सफाई एवं मृत ऊतकों को हटाना
  • पेनिसिलिन अथवा मेट्रोनिडाजोल जैसे एंटीबायोटिक्स
  • मांसपेशियों को शिथिल करने वाली दवाएँ एवं शामक
  • तरल चिकित्सा (Fluid Therapy)
  • पर्याप्त पोषण
  • शांत, अंधेरा एवं कम शोर वाला वातावरण
  • आवश्यकता पड़ने पर ऑक्सीजन अथवा कृत्रिम श्वसन

टेटनस से बचाव

टेटनस का उपचार कठिन एवं महंगा हो सकता है, जबकि इसकी रोकथाम सरल एवं अत्यंत प्रभावी है।

  1. नियमित टीकाकरण

टेटनस से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय नियमित टीकाकरण है।

  • प्राथमिक टीकाकरण के बाद 3–4 सप्ताह में दूसरी खुराक दें।
  • इसके बाद प्रतिवर्ष बूस्टर डोज दें।
  • किसी भी बड़ी चोट या शल्यक्रिया से पहले अथवा बाद में पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार बूस्टर अवश्य लगवाएँ।

ध्यान दें: टेटनस टॉक्सॉइड की मात्रा विभिन्न कंपनियों के वैक्सीन के अनुसार भिन्न हो सकती है। इसलिए हमेशा निर्माता अथवा पशु चिकित्सक के निर्देशों का पालन करें।

  1. घाव की उचित देखभाल
  • घाव को तुरंत साफ करें।
  • एंटीसेप्टिक दवा का प्रयोग करें।
  • गहरे घाव का उपचार पशु चिकित्सक से कराएँ।
  1. स्वच्छ शल्यक्रिया

बधियाकरण, सींग काटना या अन्य शल्यक्रियाएँ हमेशा स्वच्छ एवं निष्फल (Sterile) उपकरणों से कराएँ।

  1. स्वच्छ पशुशाला

पशुशाला को साफ एवं सूखा रखें। नुकीली वस्तुओं, तार, कील या अन्य चोट पहुँचाने वाली वस्तुओं को हटाएँ।

  1. नवजात की नाभि की देखभाल

जन्म के तुरंत बाद नाभि को आयोडीन या अन्य अनुशंसित एंटीसेप्टिक से उपचारित करें ताकि संक्रमण की संभावना कम हो।

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पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

✔ पशुओं को समय पर टेटनस का टीका लगवाएँ।
✔ किसी भी घाव को हल्के में न लें।
✔ प्रसव एवं शल्यक्रिया के समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
✔ टेटनस के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
✔ रोगी पशु को शांत, कम रोशनी एवं कम शोर वाले स्थान पर रखें।

निष्कर्ष

टेटनस एक जानलेवा लेकिन पूर्णतः रोकथाम योग्य रोग है। उचित टीकाकरण, घावों की समय पर देखभाल, स्वच्छ प्रबंधन तथा शीघ्र पशु चिकित्सकीय उपचार से इस रोग से होने वाली अधिकांश मौतों को रोका जा सकता है। पशुपालकों में जागरूकता बढ़ाना ही इस रोग की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है।

 

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