पालतू जानवर में मूत्र पथरी : उपचार और रोकथाम

0
115

पालतू जानवर में मूत्र पथरी : उपचार और रोकथाम

शिल्पा गजभिये, शशि प्रधान, देवेंद्र कुमार गुप्ता ,बृजेश सिंह ,अमिता तिवारी, रणवीर जाटव, अर्पणा रायकवार

पशु औषधि विभाग, पशुचिकित्सा एवं पशुपालन विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर (म.प्र.)

(नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान वि.वि.)

मूत्र पथ की पथरी (यूरोलिथियासिस) एक आम समस्या है जो कुत्तों और बिल्लियों में निचले मूत्र पथ की बीमारी के लिए जिम्मेदार होती है। ब्लैडर यानी मूत्राशय की पथरी (कैलकुली) का बनना विभिन्न खनिजों के जमाव और क्रिस्टल बनने से जुड़ा है। मूत्र की पथरी बनने के लिए कई कारक जिम्मेदार होते हैं। इसके उपचार और रोकथाम के लिए इन प्रक्रियाओं को समझना महत्वपूर्ण है।

सामान्य तौर पर, पथरी बनने में योगदान देने वाली स्थितियों में शामिल हैं:

  • पेशाबमें लवण (salts) का उच्च सांद्रता (high concentration) होना
  • मूत्रमार्ग में इन लवणों और क्रिस्टल का कुछ समय तक रुके रहना
  • एकअनुकूल पीएच (pH) जो लवण के क्रिस्टलीकरण को बढ़ावा देता है
  • क्रिस्टलबनने के लिए एक आधार (scaffold) मिलना
  • क्रिस्टलबनने से रोकने वाले शरीर के प्राकृतिक अवरोधकों (inhibitors) में कमी आना

पथरी बनने की शुरुआत करने वाले घटनाक्रम को पूरी तरह से समझा नहीं गया है। भोजन में खनिजों और प्रोटीन की अधिक मात्रा और अत्यधिक गाढ़े पेशाब के कारण मूत्र में लवणों की संतृप्ति (saturation) बढ़ सकती है। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) जैसे बैक्टीरिया के संक्रमण भी पेशाब में लवण की सांद्रता को बढ़ा सकते हैं।

लक्षण (Signs & Symptoms)

आपके पालतू जानवर में दिखने वाले लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि पथरी कहाँ स्थित है। अधिकांश मूत्र पथरी मूत्राशय (bladder) या मूत्रमार्ग (urethra) में होती है, और केवल कुछ ही प्रतिशत किडनी (गुर्दे) या मूत्रवाहिनी (ureter) में फंसी होती है। पथरी मूत्र मार्ग की अंदरूनी परत को नुकसान पहुँचा सकती है, जिससे सूजन (inflammation) हो जाती है। यह सूजन आपके पालतू जानवर को बैक्टीरिया के संक्रमण (UTI) के प्रति संवेदनशील बना सकती है।

मूत्राशय की पथरी (Bladder Stones) के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • पेशाबमें खून आना
  • पेशाबकरने में कठिनाई या ज़ोर लगाना
  • बार-बारथोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब करना
  • पेटमें बेचैनी या दर्द
  • घरमें अचानक पेशाब की दुर्घटनाएं होना

मूत्र पथरी यूरिन के प्रवाह को शारीरिक रूप से रोक सकती है, जिससे मूत्र मार्ग में रुकावट (urinary obstruction) पैदा हो सकती है, जिसके लिए तत्काल आपातकालीन उपचार की आवश्यकता होती है।

मूत्रमार्ग की पथरी (Urethral Stones) के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • बूंद-बूंदपेशाब टपकना
  • बिनापेशाब निकले ही पेशाब करने के लिए ज़ोर लगाना या उस मुद्रा (posture) में बैठना

यदि आपका पालतू जानवर मूत्र मार्ग में रुकावट के उपरोक्त लक्षण दिखा रहा है, तो आपको तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।

पथरी मूत्रवाहिनी (ureter – मूत्र मार्ग का वह हिस्सा जो किडनी से मूत्राशय तक यूरिन ले जाता है) में भी फंस सकती है, जिससे रुकावट पैदा होती है और किडनी को गंभीर नुकसान होता है।

मूत्रवाहिनी की पथरी (Ureteral Stones) के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

  • पेटमें दर्द या बेचैनी
  • भूखमें कमी
  • सुस्ती
  • उल्टीहोना
  • पेशाबमें खून आना

जांच और निदान (Diagnostics)

आपके प्राथमिक पशु चिकित्सक आपके पालतू जानवर के खून और पेशाब की जांच की सिफारिश कर सकते हैं। यूरिन ब्लॉक होने के कारण ईसीजी (ECG) पर दिल की धड़कन और लय में असामान्यताएं देखी जा सकती हैं। पथरी से जुड़े संक्रमण की पहचान करने के लिए न केवल यूरिन का, बल्कि मूत्राशय की परत या खुद पथरी का भी कल्चर टेस्ट जरूरी होता है।

मूत्र मार्ग का आकलन करने के लिए कई इमेजिंग टेस्ट किए जा सकते हैं। एक्स-रे (रेडियोग्राफी) और अल्ट्रासाउंड सबसे ज्यादा की जाने वाली तकनीकें हैं। अधिकांश पथरी एक्स-रे पर दिखाई दे जाती हैं। जो पथरी सामान्य एक्स-रे पर अच्छी तरह से दिखाई नहीं देती हैं, उनका निदान यूरिनरी कैथेटर के माध्यम से मूत्र मार्ग में एक कंट्रास्ट एजेंट या गैस डालकर किया जा सकता है।

अल्ट्रासाउंड जांच किडनी, मूत्रवाहिनी और मूत्राशय के मूल्यांकन में बहुत उपयोगी हो सकती है, लेकिन मूत्रमार्ग (urethra) की जांच में इसकी क्षमता सीमित होती है। हाल ही में इस्तेमाल की जाने वाली एक अन्य तकनीक ‘न्यूक्लियर सिंटिग्राफी’ है, जो किडनी के रक्त प्रवाह और कार्य के विश्लेषण के लिए एक गैर-आक्रामक (non-invasive) तरीका प्रदान करती है।

मूत्र पथरी के प्रकार (Types of Urinary Stones)

पथरी का नाम उसकी खनिज संरचना के आधार पर रखा जाता है। सबसे आम पथरी स्ट्रुवाइट, कैल्शियम ऑक्सालेट, यूरैट, सिस्टीन और सिलिका हैं।

  • स्ट्रुवाइटस्टोन्स (Struvite Stones): कुत्तों में पाया जाने वाला यह सबसे आम प्रकार है, जो सभी कैनाइन स्टोन्स का 50% हिस्सा है। बिल्लियों में इसकी व्यापकता लगभग 30% है। मिनिएचर श्नौज़र, मिनिएचर पूडल, बिचोन फ्रिसे और कॉकर स्पैनियल नस्लें इससे सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। यूरिनरी इन्फेक्शन इसका एक प्रमुख कारक है। कुछ बैक्टीरिया यूरिया पर क्रिया करके पेशाब के पीएच (pH) को बढ़ा देते हैं, जिससे स्ट्रुवाइट क्रिस्टल की घुलनशीलता कम हो जाती है। मूत्राशय की सूजन से यूरिन में ऑर्गेनिक कचरा बढ़ जाता है, जो क्रिस्टल बनने के लिए सतह प्रदान करता है।
  • कैल्शियमऑक्सालेट स्टोन्स (Calcium Oxalate Stones): कुत्तों में यह लगभग 35% और बिल्लियों में 50-70% मामलों में पाई जाती है। बिल्लियों की किडनी या मूत्रवाहिनी की 70% पथरी कैल्शियम ऑक्सालेट होती है। कुत्तों में मिनिएचर और स्टैंडर्ड श्नौज़र, मिनिएचर पूडल, बिचोन फ्रिसे, ल्हासा अप्सो, यॉर्कशायर टेरियर और शिह त्ज़ु नस्लें इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। बिल्लियों में बर्मीज़, पर्शियन और हिमालयन नस्लें सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। इसका सटीक कारण अज्ञात है, लेकिन खाने के बाद यूरिन में कैल्शियम का बढ़ना और भोजन में ऑक्सालेट की अधिक मात्रा इसके कारण हो सकते हैं।
  • यूरैटस्टोन्स (Urate Stones): कुत्तों में यह दो कारणों से बन सकती है। एक पोर्टोसिस्टेमिक शंट के मामलों से जुड़ा है। डालमेशियन (Dalmatian) नस्ल के कुत्ते, जिनमें यूरिक एसिड का लीवर परिवहन दोषपूर्ण होता है, वे भी अक्सर इस पथरी का शिकार होते हैं। इन्हें एक्स-रे से देखना मुश्किल हो सकता है लेकिन अल्ट्रासाउंड से आसानी से देखा जा सकता है।
  • सिस्टीनस्टोन्स (Cystine Stones): पेशाब में सिस्टीन का अत्यधिक निकलना किडनी का एक वंशानुगत विकार (inherited disorder) है, जिसे इसका मुख्य कारण माना जाता है। अम्लीय वातावरण (कम पीएच) में सिस्टीन की उच्च सांद्रता पथरी का रूप ले सकती है। 3 से 6 वर्ष की आयु के नर डैचशुंड (Male Dachshunds) इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ये एक्स-रे पर हल्के दिखाई दे सकते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड से बिल्कुल साफ दिखते हैं।
  • सिलिकेटस्टोन्स (Silicate Stones): इसके बनने की प्रक्रिया अज्ञात है, लेकिन भोजन में सिलिकेट्स, सिलिका एसिड और मैग्नीशियम सिलिकेट की अधिक मात्रा से इसका संबंध हो सकता है। यह मक्के के ग्लूटेन (corn gluten) और सोयाबीन के छिलकों के सेवन से जुड़ी है। जर्मन शेफर्ड, ओल्ड इंग्लिश शीपडॉग, गोल्डन और लैब्राडोर रिट्रीवर इससे सबसे अधिक प्रभावित नस्लें हैं।
READ MORE :  Prevention of Mastitis by Nutritional Intervention in Dairy Animals

उपचार (Treatment)

  • मेडिकलमैनेजमेंट (दवाइयों और डाइट द्वारा): कैल्शियम ऑक्सालेट, यूरैट, सिस्टीन और सिलिकेट पत्थरों को घुलाया नहीं जा सकता है और इनके लिए सर्जिकल उपचार (सर्जरी) की आवश्यकता होती है। स्ट्रुवाइट पथरी को कभी-कभी एक विशेष रूप से तैयार की गई कमर्शियल डाइट का उपयोग करके घुलाया जा सकता है। यह डाइट लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए नहीं होती है।
  • मूत्ररुकावट का आपातकालीन प्रबंधन: मूत्रमार्ग में फंसी पथरी के कारण होने वाली रुकावट एक गंभीर आपातकालीन स्थिति है। इसके लिए कैथेटर की मदद से पानी का प्रेशर देकर पथरी को वापस मूत्राशय में धकेला जाता है, जिसे ‘रेट्रोग्रैड यूरोहैड्रोपल्शन’ कहते हैं। या फिर पेट की दीवार के माध्यम से सुई डालकर मूत्राशय से यूरिन निकाला जाता है (सिस्टोसेंटेसिस)।
  • सर्जिकलउपचार (Surgical Treatments): पथरी निकालने की सर्जरी इस बात पर निर्भर करती है कि वह कहाँ स्थित है:
  • मूत्राशयसे पथरी निकालना: सिस्टोटॉमी (Cystotomy)
  • मूत्रमार्गसे पथरी निकालना: यूरैथ्रोटॉमी (Urethrotomy)
  • भविष्यमें रुकावट रोकने के लिए स्थायी रास्ता बनाना: यूरैथ्रोस्टॉमी (Urethrostomy) याU.
  • किडनीसे पथरी निकालना: नेफ्रोटॉमी (Nephrotomy)
  • मूत्रवाहिनीसे पथरी निकालना: यूरेट्रोटॉमी  या सब  सिस्टम स्टेंटिंग
  • इसकेअलावा लेजर लिथोट्रिप्सी एक आधुनिक और कम चीरे वाली (minimally invasive) विधि है जिससे लेजर और एंडोस्कोप के जरिए पथरी को तोड़ा जाता है।

अधिकांश प्राथमिक पशु चिकित्सक सिस्टोटॉमी खुद कर लेते हैं, लेकिन जटिल सर्जरी के लिए वे मरीजों को बोर्ड-प्रमाणित पशु शल्य चिकित्सक  के पास रेफर करना पसंद करते हैं।

 

Please follow and like us:
Follow by Email
Twitter

Visit Us
Follow Me
YOUTUBE

YOUTUBE
PINTEREST
LINKEDIN

Share
INSTAGRAM
SOCIALICON