मास्टाइटिस के जीवाणुओं का सुरक्षा कवच – बायोफिल्म और बढ़ता एंटीबायोटिक प्रतिरोध
भावना, डॉ. श्वेता आनंद
डॉ. महेश कुमार भारती, डॉ. राजीव रंजन कुमार, डॉ. अशोक कुमार मोहंती
पशु चिकित्सा औषध विज्ञान एवं विष विज्ञान विभाग,पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय,
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ,आईसीएआर-सीआईआरसी, मेरठ
परिचय

दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुओं में मास्टाइटिस (थनैला रोग) सबसे सामान्य एवं आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रोगों में से एक है। यह रोग मुख्यतः बैक्टीरिया द्वारा थन ग्रंथि में संक्रमण के कारण होता है, जिससे दूध की गुणवत्ता एवं मात्रा दोनों प्रभावित होती हैं। इसके परिणामस्वरूप दुग्ध उत्पादकों को उपचार लागत, दूध की हानि तथा पशुओं के समय से पहले निष्कासन जैसी गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
वर्तमान समय में मास्टाइटिस के उपचार हेतु एंटीबायोटिक दवाओं का व्यापक उपयोग किया जाता है,किन्तु इनका अत्यधिक एवं अनियंत्रित प्रयोग जीवाणुओं में एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) को बढ़ावा दे रहा है। इस प्रतिरोध के विकास में बायोफिल्म (Biofilm) का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बायोफिल्म क्या है?
बायोफिल्म सूक्ष्मजीवों का एक संगठित समूह होता है,जिसमें जीवाणु किसी सतह से चिपककर अपने चारों ओर एक चिपचिपा सुरक्षात्मक आवरण (Extracellular Polymeric Substance, EPS) बना लेते हैं। यह आवरण मुख्य रूप से पॉलीसैकेराइड, प्रोटीन, लिपिड तथा बाह्य डीएनए से मिलकर बना होता है।
यह सुरक्षात्मक परत जीवाणुओं को प्रतिकूल वातावरण, प्रतिरक्षा तंत्र तथा एंटीबायोटिक दवाओं से बचाती है।यही कारण है कि बायोफिल्म बनाने वाले जीवाणुओं का उपचार कठिन हो जाता है और संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है।
मास्टाइटिस उत्पन्न करने वाले प्रमुख बायोफिल्म उत्पादक जीवाणु कई रोगजनक जीवाणु बायोफिल्म बनाने की क्षमता रखते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- Staphylococcus aureus
- Escherichia coli
- Streptococcus uberis
- Streptococcus dysgalactiae
- Klebsiella pneumoniae
- Pseudomonas aeruginosa
इनमें विशेष रूप से Staphylococcus aureus अपनी मजबूत बायोफिल्म निर्माण क्षमता के कारण दीर्घकालिक एवं बार-बार होने वाले मास्टाइटिस संक्रमण के लिए जाना जाता है।
बायोफिल्म बनने की प्रक्रिया
बायोफिल्म निर्माण एक क्रमिक जैविक प्रक्रिया है, जिसमें पाँच प्रमुख चरण शामिल होते हैं—
- प्रारंभिकचिपकाव (Initial Attachment): जीवाणु किसी सतह से अस्थायी रूप से जुड़ते हैं।
- स्थायीआसंजन (Irreversible Adhesion): जीवाणु बाह्य पॉलीमेरिक पदार्थ का निर्माण कर सतह से मजबूती से चिपक जाते हैं।
- सूक्ष्मकॉलोनी निर्माण (Microcolony Formation): जीवाणु विभाजित होकर छोटे-छोटे समूह बनाते हैं।
- परिपक्वबायोफिल्म (Biofilm Maturation): बहुस्तरीय त्रि-आयामी संरचना विकसित होती है, जिसमें पोषक तत्वों के प्रवाह के लिए सूक्ष्म चैनल बनते हैं।
- विखंडनएवं प्रसार (Dispersion): कुछ जीवाणु बायोफिल्म से अलग होकर नए स्थानों पर संक्रमण स्थापित करते हैं।
बायोफिल्म एंटीबायोटिक प्रतिरोध कैसे बढ़ाता है?
बायोफिल्म जीवाणुओं को अनेक तरीकों से एंटीबायोटिक दवाओं से बचाता है।
- एंटीबायोटिककासीमित प्रवेश
बायोफिल्म की बाहरी परत दवाओं के प्रवेश में बाधा उत्पन्न करती है, जिससे पर्याप्त मात्रा में एंटीबायोटिक जीवाणुओं तक नहीं पहुँच पाती।
- निष्क्रिय(Persister) कोशिकाओंका निर्माण
बायोफिल्म के भीतर कुछ जीवाणु धीमी वृद्धि या सुप्त अवस्था में रहते हैं। अधिकांश एंटीबायोटिक केवल सक्रिय रूप से विभाजित होने वाले जीवाणुओं पर प्रभावी होती हैं, इसलिए ये कोशिकाएँ उपचार से बच जाती हैं।
- प्रतिरोधीजीनोंका आदान-प्रदान
बायोफिल्म में जीवाणु एक-दूसरे के अत्यंत निकट रहते हैं, जिससे प्लाज्मिड एवं अन्य आनुवंशिक तत्वों के माध्यम से प्रतिरोधी जीनों का आदान-प्रदान तेजी से होता है।
- इफ्लक्सपंप(Efflux Pump) की सक्रियता
कुछ जीवाणु विशेष प्रोटीन पंप विकसित कर लेते हैं जो एंटीबायोटिक दवाओं को कोशिका के बाहर निकाल देते हैं, जिससे दवा का प्रभाव कम हो जाता है।
- प्रतिरक्षातंत्रसे सुरक्षा
बायोफिल्म जीवाणुओं को श्वेत रक्त कोशिकाओं एवं अन्य प्रतिरक्षा कारकों से भी बचाता है, जिसके कारण संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है।
दुग्ध उद्योग पर प्रभाव
बायोफिल्म से संबंधित एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण—
- दूधउत्पादन में कमी आती है।
- दूधकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।
- उपचारकी लागत बढ़ जाती है।
- बार-बारसंक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
- एंटीबायोटिकअवशेष दूध में पाए जा सकते हैं।
- बहु-दवाप्रतिरोधी (Multidrug Resistant) जीवाणुओं का प्रसार बढ़ता है।
- पशुपालकोंको भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
रोकथाम एवं नियंत्रण के उपाय
बायोफिल्म से होने वाले संक्रमण की रोकथाम के लिए निम्नलिखित उपाय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं—
- दुग्धदोहन से पहले एवं बाद में थनों की उचित सफाई।
- मिल्किंगमशीन एवं उपकरणों का नियमित कीटाणुशोधन।
- संक्रमितपशुओं की शीघ्र पहचान एवं समय पर उपचार।
- एंटीबायोटिकका उपयोग संवेदनशीलता परीक्षण (Antibiotic Sensitivity Test) के आधार पर करना।
- अनावश्यकएंटीबायोटिक प्रयोग से बचना।
- फार्मस्तर पर जैव-सुरक्षा (Biosecurity) उपाय अपनाना।
- नियमितमास्टाइटिस निगरानी कार्यक्रम संचालित करना।
उभरती हुई वैकल्पिक उपचार पद्धतियाँ
वैज्ञानिक वर्तमान में बायोफिल्म को नष्ट करने हेतु कई नवीन तकनीकों पर कार्य कर रहे हैं, जैसे—
- बैक्टीरियोफेजथेरेपी
- एंटीमाइक्रोबियलपेप्टाइड्स
- औषधीयपौधों के जैव सक्रिय यौगिक
- नैनोप्रौद्योगिकीआधारित उपचार
- प्रोबायोटिक्स
- क्वोरमसेंसिंग अवरोधक
- एंजाइमआधारित बायोफिल्म विघटन तकनीक
इन तकनीकों से भविष्य में एंटीबायोटिक पर निर्भरता कम करने में सहायता मिल सकती है।
निष्कर्ष
बायोफिल्म निर्माण मास्टाइटिस उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुकूलन रणनीति है,जो उन्हें एंटीबायोटिक दवाओं तथा पशु की प्रतिरक्षा प्रणाली से सुरक्षा प्रदान करती है। यही कारण है कि बायोफिल्म बनाने वाले जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न संक्रमण अक्सर दीर्घकालिक, पुनरावर्ती एवं उपचार के प्रति प्रतिरोधी होते हैं। अतः प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, विवेकपूर्ण एंटीबायोटिक उपयोग, शीघ्र निदान तथा नवीन एंटी-बायोफिल्म उपचार रणनीतियों को अपनाना समय की आवश्यकता है। वैज्ञानिक अनुसंधान और जागरूकता के माध्यम से ही हम मास्टाइटिस तथा एंटीबायोटिक प्रतिरोध की बढ़ती समस्या पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं।
किसानों के लिए संदेश
“थनों की स्वच्छता रखें,बिना सलाह एंटीबायोटिक का प्रयोग न करें,नियमित रूप से दूध की जांच कराएं तथा मास्टाइटिस के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। यही स्वस्थ पशु और अधिक दुग्ध उत्पादन की कुंजी है।”



