कृषि एवं डेयरी पशुपालन में ड्रोन प्रौद्योगिकी: वर्तमान उपयोग एवं भविष्य की संभावनाएँ
मनीषा चौधरी एवं अजय कुमार डांग*
दुग्धस्राव एवं प्रतिरक्षा-शरीरक्रिया प्रयोगशाला, पशु शरीर क्रिया विज्ञान विभाग
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल-132001, हरियाणा, भारत
*सम्पर्क लेखक: ajay.dang@icar.org.in; rajadang@gmail.com
सार
कृषि एवं डेयरी पशुपालन क्षेत्र में मानवरहित विमान (ड्रोन) प्रौद्योगिकी एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है। तापीय, बहु-वर्णक्रमीय एवं दृश्य-प्रकाश संवेदकों से सुसज्जित ये विमान फसल स्वास्थ्य निगरानी, कीटनाशक छिड़काव, पशु स्वास्थ्य परीक्षण, चरागाह प्रबंधन तथा अवसंरचना निरीक्षण में उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। भारत सरकार के कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन के अंतर्गत इन विमानों की खरीद पर 40-100% तक की सहायता उपलब्ध है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के विधिक ढाँचे के साथ यह प्रौद्योगिकी भारतीय डेयरी एवं कृषि क्षेत्र में उत्पादकता वृद्धि और श्रम-लागत में कमी का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
मुख्य शब्द: मानवरहित विमान, तापीय संवेदक, बहु-वर्णक्रमीय प्रतिबिम्बन, डेयरी पशु प्रबंधन,
- परिचय
भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ कृषि एवं पशुपालन लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है। आधुनिक प्रौद्योगिकी के विकास के साथ मानवरहित विमान (ड्रोन) कृषि क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभरे हैं। ये विमान फसल प्रबंधन, पशु निगरानी, भूमि सर्वेक्षण एवं कीटनाशक छिड़काव जैसे अनेक कार्यों में पारंपरिक विधियों की तुलना में अधिक सटीक, तीव्र एवं किफायती हैं। विशेष रूप से डेयरी पशुपालन में, जहाँ श्रम की कमी एवं विशाल चरागाहों की निगरानी एक बड़ी चुनौती है, यह प्रौद्योगिकी परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है। इस लेख में कृषि एवं डेयरी क्षेत्र में ड्रोन के प्रकार, उपयोग, तकनीकी विशेषताएँ, सरकारी सहायता एवं विधिक प्रावधानों पर संक्षिप्त प्रकाश डाला गया है।
- कृषि में मानवरहित विमानों के प्रकार
कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में मुख्यतः निम्नलिखित प्रकार के मानवरहित विमानों का उपयोग किया जाता है:
- बहु-रोटर विमान: सटीक संतुलन के कारण खेतों की मानचित्रण एवं कीटनाशक छिड़काव के लिए अत्यंत लोकप्रिय।
- स्थिर-पंख विमान: अधिक विद्युत-कोश आयु एवं तीव्र गति के कारण बड़े खेतों के हवाई सर्वेक्षण हेतु उपयुक्त।
- संकर ऊर्ध्वाधर उड्डयन-अवतरण विमान: बिना भूमि-पट्टी के उड़ान भरने में सक्षम; बहु-वर्णक्रमीय एवं तापीय संवेदकों से मृदा नमी, फसल स्वास्थ्य एवं रोग की प्रारंभिक पहचान संभव।
- तापीय प्रतिबिम्बन विमान: शरीर की ऊष्मा के आधार पर रात्रि में भी पशुओं को खोजने में सक्षम।
- डेयरी पशुपालन में मानवरहित विमान की भूमिका
3.1 पशु स्वास्थ्य एवं कल्याण निगरानी
तापीय एवं बहु-वर्णक्रमीय संवेदकों से युक्त विमान शरीर के तापमान, सूजन या मुद्रा में सूक्ष्म परिवर्तनों के आधार पर थनैला रोग, लंगड़ापन एवं ताप तनाव से पीड़ित पशुओं की पहचान कर सकते हैं। बार-बार किए गए सर्वेक्षण व्यक्तिगत पशुओं का दीर्घकालिक अभिलेख तैयार करते हैं, जिससे प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ विकसित होती हैं। इससे नैदानिक रोग घटते हैं, उपचार लागत कम होती है और दूध उत्पादन स्थिर रहता है।
3.2 झुंड एवं चरागाह प्रबंधन
बहु-वर्णक्रमीय प्रतिबिम्बन से पशुपालक घास की ऊँचाई, जैवभार, पोषक तत्व स्थिति एवं खरपतवार दबाव का अनुमान लगाकर चरागाह खंड-परिवर्तन एवं उर्वरक उपयोग को अनुकूलित कर सकते हैं। इससे आहार-कुशलता बढ़ती है, आयातित सांद्र आहार पर निर्भरता घटती है और प्रति पशु हरित-गृह गैस उत्सर्जन कम होता है।
3.3 बछड़ा जन्म एवं सुरक्षा सहायता
दूरस्थ चरागाहों में प्रसव-सन्निकट गायों की पहचान, नवजात बछड़ों की जाँच तथा फँसे या घायल पशुओं को खोजना सरल हो जाता है। ध्वनि-विस्तारक यंत्र युक्त विमान पशुओं को आकाशीय पशु-चालक की भाँति मार्गदर्शित कर शारीरिक संचालन को न्यूनतम करते हैं।
3.4 अवसंरचना निरीक्षण एवं जैव-सुरक्षा
नियमित उड़ानों से बाड़ों, जल-सरोवरों एवं तरल-खाद नालियों की क्षति या रिसाव शीघ्र पहचाना जा सकता है। संगरोध क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण कर मानव-आवागमन सीमित करने से जैव-सुरक्षा सुदृढ़ होती है।
3.5 आँकड़ा समेकन एवं सटीक पोषण
विमानों से प्राप्त आँकड़ों को झुंड-अभिलेख एवं आहार-विश्लेषण आँकड़ाकोश के साथ जोड़कर सटीक पोषण प्रबंधन के निर्णय लिए जा सकते हैं। आयतन-अनुमान कलन-विधि किण्वित चारे के आकार की गणना कर आहार-वितरण का अनुश्रवण करती है एवं चरागाह जैवभार मानचित्रों से आपूर्ति-माँग संतुलन बनाया जा सकता है।
- तकनीकी विशेषताएँ
कृषि उपयोग हेतु अभिकल्पित इन विमानों में 10-30 लीटर क्षमता के उच्च-घनत्व बहुलक टंकी लगे होते हैं। द्वि-कणीकरण छिड़काव यंत्र 50-500 सूक्ष्ममीटर आकार की बूँदें निर्मित कर प्रत्येक पत्ते पर अपव्यय रहित छिड़काव सुनिश्चित करते हैं। 360 अंश परिधीय रडार एवं द्विनेत्री दृष्टि प्रणाली 1-50 मीटर की दूरी से बाधाओं को पहचानकर स्वतः मार्ग परिवर्तन करती है। भूमि-अनुगामी संवेदक असमतल भूमि में भी 3 मीटर की सुरक्षित ऊँचाई बनाए रखता है। 15,000 मिली-आम्पियर घंटे से अधिक की विद्युत-कोश 9-12 मिनट में आवेशित होकर 10-15 मिनट की उड़ान प्रदान करती है।
- लागत एवं सरकारी सहायता
भारत में कृषि ड्रोन की लागत ₹4 लाख से ₹12 लाख या अधिक के मध्य है। सरकार कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन के तहत निम्नलिखित सहायता देती है:
- लघु, सीमांत, महिला एवं अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को 50% (अधिकतम ₹5 लाख)
- सामान्य किसानों को 40% (अधिकतम ₹4 लाख)
- किसान उत्पादक संगठनों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों को 75-100% विशेष अनुदान
किसान राज्य कृषि विभाग के संजाल-स्थल पर आधार, भूमि-अभिलेख एवं बैंक विवरण सहित आवेदन कर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से यह सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
- विधिक प्रावधान एवं पंजीकरण
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के अनुसार व्यावसायिक ड्रोन उड़ाने हेतु:
- मान्यता प्राप्त दूरस्थ पायलट प्रशिक्षण संगठन से 5-7 दिवसीय प्रशिक्षण एवं 10 वर्षीय प्रमाण-पत्र अनिवार्य
- पात्रता: आयु 18-65 वर्ष, न्यूनतम 10वीं उत्तीर्ण, वैध चिकित्सा प्रमाण-पत्र
- 250 ग्राम से अधिक भार के विमान हेतु अंकीय आकाश मंच पर पंजीकरण एवं विशिष्ट पहचान संख्या अनिवार्य
- व्यावसायिक संचालकों के पास तृतीय-पक्ष बीमा आवश्यक
- निष्कर्ष
मानवरहित विमान (ड्रोन) प्रौद्योगिकी कृषि एवं डेयरी पशुपालन में पशु स्वास्थ्य निगरानी, चरागाह प्रबंधन, अवसंरचना निरीक्षण एवं सटीक पोषण के क्षेत्र में व्यापक अनुप्रयोग का साधन बन चुकी है। सरकारी सहायता, सुदृढ़ विधिक ढाँचे एवं कृत्रिम मेधा के समेकन के साथ यह प्रौद्योगिकी भारत के डेयरी क्षेत्र को अधिक उत्पादक, कुशल एवं टिकाऊ बनाएगी। इसे सफलतापूर्वक अपनाने के लिए पशुपालकों को पर्याप्त प्रशिक्षण, सहायता एवं जागरूकता आवश्यक है।



